Thursday, July 23, 2026
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यूकॉस्ट के विज्ञान–प्रौद्योगिकी सम्मेलन और विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन में शोध व तकनीकी सत्रों की धूम

देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन (WSDM 2025) और 20वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC) ने शुक्रवार को वैज्ञानिक संवाद और ज्ञान–विनिमय का व्यापक मंच प्रदान किया।

29 नवंबर को आयोजित सम्मेलन के दौरान बीस से अधिक तकनीकि सत्र हुए, जिनमें देश–विदेश से आए शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने आपदा प्रबंधन, विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और प्रौद्योगिकी से जुड़े अपने शोधपत्र और विचार प्रस्तुत किए। इसके साथ ही दस से अधिक विशिष्ट सत्रों ने विभिन्न उभरते विषयों पर गहन विमर्श का अवसर दिया।

सम्मेलन ने वैज्ञानिक नवाचार, सतत समाधान और आपदा जोखिम न्यूनीकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक दृष्टिकोण सामने रखा। बारह उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी सत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सतत वित्तपोषण, आपदा जोखिम वित्त, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, कार्बन इकोसिस्टम, मीडिया की भूमिका, सिक्किम मॉडल और हिमालयी कॉरिडोर विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समुदाय-उन्मुख बनाकर सामाजिक विकास, कृषि, स्वास्थ्य सेवाएँ, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन को सशक्त करने पर विशेष जोर दिया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूती देना और समुदायों को सुरक्षित भविष्य के लिए तैयार करना रहा।

सम्मेलन में वॉटर कॉन्क्लेव भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के पारस्परिक संबंधों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की। प्रो. राजीव सिन्हा, डॉ. राघवन कृष्णन, प्रो. अनिल कुलकर्णी, डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. राकेश ने नदियों के बदलते स्वरूप, मौसमीय अस्थिरता, हिमनदों की स्थिति और जल शासन जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए।

सत्र में अवैध रेत खनन, हिमालयी ग्लेशियरों में तेजी से हो रहे परिवर्तन और एकीकृत जल नीति की तत्काल आवश्यकता पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की गईं। राज्य स्तरीय वॉटरशेड परिषद के उपाध्यक्ष श्री शंकर कोरंगा और आईएएस मीनाक्षी सुन्दरम ने विज्ञान, प्रशासन और नीतिगत फैसलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर बल दिया।

सम्मेलन के दौरान ट्राइबल कम्यूनिटी हेतु विशेष सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें जनजातीय समुदायों को आपदा-जोखिम से सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर विमर्श हुआ। इसके अलावा आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका पर केंद्रित एक सत्र में विभिन्न मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकारों ने सहभागिता की और आधुनिक संचार माध्यमों के प्रभाव, जिम्मेदारी और चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

पूरे आयोजन के दौरान शोध और नवाचार की उत्साहजनक झलक दिखाई दी। 500 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिसने सम्मेलन को ज्ञान, अनुभव और नवीन सोच से समृद्ध बनाया। यह आयोजन न केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राज्य की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करता है, बल्कि वैश्विक आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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