देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों की जांच के बाद प्रशासन की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में एक मदरसा सील किया गया है और दो के प्रबंधकों ने संचालन बंद करने की लिखित सहमति दी है। वहीं हल्द्वानी में भी दो मदरसों को सील कर दिया गया है। प्रदेशभर में अब तक 17 मदरसे सील हो चुके हैं, जबकि तीन ने लिखित रूप से संचालन बंद करने की सूचना दी है। यानी कुल 20 बिना मान्यता संचालित मदरसों का संचालन रुकवा दिया गया है।
यह कार्रवाई राज्य में लागू नई अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था के बाद शुरू हुई जांच का हिस्सा है। एक जुलाई 2026 से पुरानी मदरसा बोर्ड व्यवस्था समाप्त होने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए मान्यता और शैक्षणिक मानकों का नया ढांचा लागू किया गया है। प्रशासन ने पहले संस्थानों से जरूरी दस्तावेज मांगे, निरीक्षण किए और फिर रिकॉर्ड उपलब्ध न होने पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू की।
शुरुआती चरण में रुद्रपुर में मदरसे सील किए गए। इसके बाद रुड़की, देहरादून, हल्द्वानी समेत अलग-अलग जिलों में जांच तेज हुई। कार्रवाई के साथ सरकार का फोकस उन संस्थानों पर है, जो निर्धारित मान्यता प्रक्रिया से बाहर रहकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
आजाद कॉलोनी में मदरसा सील
अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि देहरादून में आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को सील किया गया है।
उन्होंने बताया कि आजाद कॉलोनी, माजरा के मदरसा दार-ए-अरकम और मदरसा दारूल उलूम रहीमिया के प्रबंधकों ने मदरसों का संचालन बंद करने से संबंधित लिखित अंडरटेकिंग दी है। इन तीन मामलों को मिलाकर देहरादून में एक संस्थान सील हुआ और दो का संचालन प्रबंधकों की लिखित सहमति के बाद बंद कराया गया।
हल्द्वानी में दस्तावेज न देने पर दो मदरसे सील
हल्द्वानी में शनि बाजार रोड, गौजाजाली उत्तर स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते आमिना और इंदिरा नगर, बनभूलपुरा में चल रहे एक बिना मान्यता मदरसे को सील किया गया है।
हल्द्वानी नगर मजिस्ट्रेट ए.बी. वाजपेयी के अनुसार, दोनों मदरसा प्रबंधनों से मान्यता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई।
मान्यता और गुणवत्ता पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान को मान्यता और तय नियमों के बिना संचालित नहीं होने दिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ निर्धारित शैक्षणिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री का कहना है कि बच्चों के भविष्य से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों के विपरीत संचालित संस्थानों पर आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।






