Thursday, July 23, 2026
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टिहरी झील में ‘इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप-2025’ और ‘चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप-2025’ का भव्य समापन

नई टिहरी। टिहरी झील अंतरराष्ट्रीय वाटर स्पोर्ट्स का केंद्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। रविवार को यहाँ ‘इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप-2025’ और ‘चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप-2025’ का शानदार समापन हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभागियों एवं आयोजकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में 22 देशों से आए 300 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया और विभिन्न प्रतियोगिताओं में दमखम दिखाया। मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों से संवाद किया और उनके जोश व प्रदर्शन की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की भागीदारी टिहरी झील को वैश्विक साहसिक खेल मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाती है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए टीएचडीसी, एशियन कायकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन, उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन और अन्य सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी झील अब केवल जल प्रबंधन या ऊर्जा उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय रोजगार का नया आधार बन चुकी है। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहें और यहाँ एडवेंचर स्पोर्ट्स की सतत गतिविधियाँ विकसित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल युवाओं के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के साथ अनुशासन, टीमवर्क और संघर्षशीलता जैसे मूल्यों को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियानों के माध्यम से देश में खेल-संस्कृति को बढ़ाने के प्रयासों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय खेलों में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है, ओलंपिक क्वालिफाई करने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी है और 2023 एशियाई खेलों में भारत ने 107 पदक जीतकर इतिहास रचा। उन्होंने कहा कि 2030 में भारत अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और केंद्र सरकार ने खेल बजट में तीन गुना वृद्धि की है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि उत्तराखंड में इस वर्ष सफलतापूर्वक सम्पन्न 38वें राष्ट्रीय खेलों ने राज्य की पहचान “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित की है। उत्तराखंड ने पहली बार 103 पदक जीतकर राष्ट्रीय खेलों में 7वाँ स्थान प्राप्त किया, जो राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसके चलते उत्तराखंड अब अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी करने में सक्षम हो चुका है। हाल ही में देहरादून स्पोर्ट्स स्टेडियम के आइस रिंक में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का सफल आयोजन इसका उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में शीघ्र “स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान” लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत आठ शहरों में 23 नई खेल अकादमियाँ स्थापित होंगी, जहाँ हर वर्ष 920 अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट और लगभग 1000 अन्य खिलाड़ी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार हल्द्वानी में पहला राज्य खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। नई खेल नीति के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है तथा स्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रशिक्षण व शिक्षा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, उदीयमान खिलाड़ी योजना, खेल-किट योजना, मुख्यमंत्री खेल विकास निधि, विभिन्न छात्रवृत्तियाँ, उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार, हिमालय खेल रत्न पुरस्कार और प्रशिक्षकों के लिए द्रोणाचार्य अवार्ड जैसी व्यवस्थाएँ भी लागू की जा रही हैं। साथ ही राजकीय सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए चार प्रतिशत खेल-कोटा पुनः लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री ने विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए कहा कि खेल की वास्तविक पहचान जीत से अधिक खेल-भावना में है। उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल-संस्कृति का परिचय दिया है और उत्तराखंड के युवा इसी भावना के साथ आगे बढ़ते रहें, राज्य और देश के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड और भारत के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी ऊँचाइयाँ छूएँगे। समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी टिहरी नितिका खंडेलवाल एवं जिला प्रशासन के अधिकारी, टीएचडीसी के सीएमडी सीपन गर्ग, विभिन्न देशों से आए खिलाड़ी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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