देहरादून। बदलता मौसम, घटते जलस्रोत और बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं हिमालय के सामने खड़ी चुनौती की गंभीर तस्वीर दिखा रही हैं। ऐसे में हिमालय को बचाना केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का सवाल भी है। हिमालय दिवस पर देहरादून स्थित यूकॉस्ट में आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और विद्यार्थियों ने इसी विषय पर मंथन किया।
‘हिमालय विज्ञान संवाद’ नाम से आयोजित कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि हिमालयी क्षेत्रों में विकास योजनाएं स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय संतुलन और समुदायों के अनुभवों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। आयोजन यूकॉस्ट, हेस्को, मैती संस्था और हिमालयन एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल ने कहा कि हिमालय की पारिस्थितिकी बेहद संवेदनशील है। इसके संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने संस्थानों, समुदायों और युवाओं से मिलकर काम करने की अपील की।
तकनीक से होगी पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि हिमालय देश की जल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध, तकनीक, नवाचार और स्थानीय ज्ञान को एक-दूसरे से जोड़ना होगा।
आरआरएससी-नॉर्थ, इसरो के वैज्ञानिक ‘जी’ एवं उप महाप्रबंधक डॉ. समीर सरन ने बताया कि रिमोट सेंसिंग और अंतरिक्ष तकनीक के माध्यम से हिमालयी इलाकों में पर्यावरणीय तथा भौगोलिक बदलावों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है। इससे प्राकृतिक संसाधनों की योजना और प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।
केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बचेगा हिमालय
हेस्को के संस्थापक पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि प्रकृति और विकास में संतुलन बनाना जरूरी है। हिमालय की सुरक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें सक्रिय भागीदारी करनी होगी।
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की प्रो. रीमा पंत ने हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण में स्थानीय समाज और पारंपरिक ज्ञान की उपयोगिता बताई। राज्य हिमालयन परिषद के सदस्य आचार्य सुशांत राज ने सामुदायिक भागीदारी तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की टीम ने पर्यावरण जागरूकता पर नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया। इसमें विद्यार्थी, वैज्ञानिक, अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि और अन्य लोग शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में 140 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट की वैज्ञानिक डॉ. मंजू सुंदरीयाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओम प्रकाश नौटियाल ने दिया।






