देहरादून। उत्तराखंड की पहली इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण तय रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। परियोजना पर पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद अब तक केवल 40.5 प्रतिशत भौतिक प्रगति हुई है। इस पर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने नाराजगी जताते हुए कार्यदायी संस्था की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने साफ कहा कि निर्माण में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। दोषियों से नुकसान की वसूली भी कराई जाएगी। अब परियोजना की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक 15 दिन में की जाएगी।
साइट पर बढ़ानी होगी मैनपावर और मशीनरी
निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान डीएम ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता को उच्चस्तरीय जांच कराने को कहा। कार्यदायी संस्था को तत्काल लंबित औपचारिकताएं पूरी करने और साइट पर पर्याप्त मैनपावर, मशीनरी तथा निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
डीएम ने कहा कि यह राज्य की महत्वपूर्ण परियोजना है। काम में अब भी अपेक्षित तेजी नहीं आई तो संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
21 करोड़ रुपये होल्ड करने पर मांगा जवाब
बैठक में परियोजना के लिए उपलब्ध ₹21 करोड़ की धनराशि होल्ड रखने का मामला भी उठा। डीएम ने इस पर कार्यदायी संस्था से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि पैसा उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य लंबित रहना गंभीर विषय है और समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी है।
जून में शुरू होने वाले काम अब तक नहीं हुए
एक्सटर्नल सीवरेज सिस्टम, टाइल वर्क, साइट पर संसाधनों की तैनाती और डोर शटर फिटिंग जैसे कार्य जून तक शुरू हो जाने चाहिए थे, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। समीक्षा में पर्ट चार्ट में भ्रामक और गलत जानकारी देने की बात भी सामने आई।
डीएम ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
ई-बसों का नियमित संचालन भी सुनिश्चित करने के निर्देश
बैठक में स्मार्ट सिटी के तहत संचालित ई-बसों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिए कि तय रूटों पर ई-बसों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए। जो बसें संचालन में नहीं हैं, उनके कारणों की स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता देवेंद्र प्रकाश, स्मार्ट सिटी के एसीईओ तीर्थ पाल सिंह, एजीएम आईटी मनवीर जोशी और एजीएम वाटर वर्क केपी चमोला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।






