गोपेश्वर। मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा अब आस्था के अगले पड़ाव में पहुंच गई है। बधाण क्षेत्र की मां राजराजेश्वरी नंदा डोली मायके पक्ष के अंतिम पड़ाव से आगे बढ़कर ससुराल क्षेत्र में पहुंच गई। डोली के आगमन पर गांवों में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। मां नंदा के जयकारों, जागरों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।
डोली यात्रा के मार्ग में ग्रामीणों ने श्रद्धा के साथ मां नंदा का स्वागत किया। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने यात्रा में भाग लेकर स्थानीय परंपराओं को जीवंत रखा। अब आगे के पड़ावों में मां नंदा का स्वागत ससुराल पहुंची बेटी की तरह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।
डुंगरी में हुआ बधाण की नंदा डोली का रात्रि विश्राम
बुधवार को बधाण क्षेत्र की नंदा डोली डुंगरी गांव पहुंची, जहां रात्रि विश्राम हुआ। डोली के दर्शन के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने मां नंदा से परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
मौसम खुलने और धूप निकलने के बाद यात्रा मार्ग पर हिमालयी गांवों की सुंदरता भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। जैसे-जैसे डोलियां अगले पड़ावों की ओर बढ़ रही हैं, यात्रा में शामिल होने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
कम्यार पहुंची बंड क्षेत्र की नंदा डोली
बंड क्षेत्र की नंदा डोली नौरख, पीपलकोटी, मल्ला अगथल्ला, नंदोली मंदिर, रैतोली और नरगोली गांवों से होती हुई कम्यार गांव पहुंची। यहां ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से डोली का स्वागत किया और रात्रि विश्राम की व्यवस्था की।
वहीं, कुरुड़-दशोली की नंदा डोली सेमा गांव से बैरासकुंड होते हुए मटई-ग्वाड़ गांव पहुंची। डोली के दर्शन और स्वागत के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
सोशल मीडिया पर भी दिख रही बड़ी जात की झलक
यात्रा के साथ चल रहे युवा और कंटेंट क्रिएटर लोकगीतों, जागरों, पारंपरिक परिधानों और धार्मिक अनुष्ठानों की झलक कैमरे में कैद कर रहे हैं। इससे उत्तराखंड की इस महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक यात्रा की तस्वीरें देश-दुनिया तक पहुंच रही हैं।
12 वर्ष में आयोजित होने वाली नंदा देवी बड़ी जात यात्रा उत्तराखंड की आस्था, लोकसंस्कृति और सामूहिक परंपराओं का बड़ा प्रतीक मानी जाती है।






