Thursday, July 23, 2026
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हिमालय दिवस पर बोले मुख्यमंत्री धामी, “प्रकृति और विकास का सामंजस्य ही सुखद भविष्य की कुंजी”

देहरादून। विकास कार्यों की योजनाएं तैयार करते वक्त पर्यावरणीय पहलू की अनदेखी महंगी पड़ सकती है। प्रकृति और विकास के बीच सामंजस्य ही सुखद भविष्य की कुंजी है। सीएम धामी मंगलवार को आईआरडीटी सभागार में आयोजित हिमालय दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियाँ देश की जीवनधारा हैं और यहाँ की दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ आयुर्वेद की नींव हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय दिवस पर कहा कि हिमालय केवल ऊँची चोटियों और ग्लेशियरों का समूह नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित विकास इस धरोहर को खतरे में डाल रहे हैं, ऐसे में हिमालय संरक्षण केवल सरकार की नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि इस वर्ष पूरे हिमालयी क्षेत्र में आई आपदाओं ने चेतावनी दी है कि हमें पर्यावरणीय दृष्टिकोण से नई रणनीति बनानी होगी। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक,  विधायक किशोर उपाध्याय, मेयर सौरभ थपलियाल, दर्जाधारी मधु भट्ट, यूकॉस्ट महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत और सूर्यकांत धस्माना सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

जलवायु संकट से बढ़ रही आपदाएँ

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार बदलते मौसम पैटर्न के कारण अब क्लाउड बर्स्ट और भूस्खलन जैसी आपदाएँ आम हो गई हैं। इन घटनाओं की आवृत्ति और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। हाल की आपदाओं ने साफ किया है कि हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विशेषज्ञों की सलाह के साथ आगे बढ़ना होगा।

आपदाओं का प्रभाव कम करने को प्रयासरत सरकार

सीएम धामी ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने हिमालय संरक्षण हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। साथ ही इस वर्ष नवंबर में विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन उत्तराखंड में आयोजित होगा। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान और जनभागीदारी कार्यक्रम इस दिशा में उठाए गए अहम कदम हैं।

डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम से प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन का प्रयास

प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन के लिए “डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम” शुरू किया गया है, जिससे अब तक 72 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। पर्यटन के क्षेत्र में सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकें।

स्थानीय समुदाय की भूमिका हमेशा से अहम

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की परंपराएँ और जीवनशैली हमें सिखाती हैं कि प्रकृति के साथ सामंजस्य कैसे बनाया जाए। पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन में स्थानीय समुदाय की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। छोटे-छोटे प्रयास जैसे पानी की बचत, वृक्षारोपण और प्लास्टिक का कम उपयोग भी हिमालय की रक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसी क्रम में हर साल 2 से 9 सितंबर तक हिमालय जनजागरूकता सप्ताह मनाने का निर्णय लिया गया है।

 

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