देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कार्यालय पहुंचे तो उनके गले में लटकी एक तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा। यह तस्वीर किसी राजनीतिक नेता या देवी-देवता की नहीं, बल्कि उनकी मां की थी। रावत ने मां की तस्वीर गले में डालकर ED कार्यालय जाने के पीछे की वजह भी बताई और इसे अपने लिए भावनात्मक ताकत और सुरक्षा का प्रतीक बताया।
हरीश रावत पिछले कुछ दिनों से अपने पूर्व निजी सहायक और OSD रहे चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई को लेकर लगातार अपनी बात रख रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर मां की सौगंध लेते हुए कहा था कि उन्होंने नौकरी देने के बदले कभी किसी से पैसा नहीं लिया।
मां की तस्वीर को बताया अपना ‘कवच’
ED कार्यालय जाते समय हरीश रावत ने अपनी मां की तस्वीर गले में पहन रखी थी। उन्होंने इसके पीछे भावनात्मक वजह बताते हुए कहा कि जब मां साथ हो तो उन्हें किसी दूसरी सुरक्षा की आवश्यकता महसूस नहीं होती। मां की तस्वीर उनके लिए साहस और विश्वास का स्रोत है।
उनका यह अंदाज इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि कुछ दिन पहले उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों के बीच मां को याद करते हुए सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी।
पहले मां की सौगंध लेकर कही थी यह बात
इससे पहले हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए कहा था कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति को नौकरी दिलाने या नौकरी देने के बदले पैसा नहीं लिया। उन्होंने यहां तक कहा कि पैसा लेना तो दूर, नौकरी के बदले किसी से चाय-पानी तक स्वीकार नहीं किया।
रावत ने उस पोस्ट में अपनी मां और उनके दूध की सौगंध लेते हुए आरोप लगाया था कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
चंदन सिंह जीना पर कार्रवाई के बाद गरमाया मामला
यह पूरा विवाद हरीश रावत के पूर्व निजी सहायक और OSD रहे चंदन सिंह जीना से जुड़ी ED की कार्रवाई के बाद ज्यादा चर्चा में आया। रावत ने जीना के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि लंबे समय तक उनके साथ काम करने वाले जीना की जीवनभर की कमाई तक सीज कर दी गई और इससे उनके परिवार के सामने आर्थिक परेशानी पैदा हो सकती है।
‘राजनीतिक पद देने के बदले भी पैसा नहीं लिया’
हरीश रावत ने अपने बचाव में यह भी कहा कि उन्होंने किसी को राजनीतिक पद दिलाने के बदले पैसा नहीं लिया। हालांकि उन्होंने माना कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने हजारों लोगों के काम और रोजगार आदि के लिए सिफारिशें कीं, लेकिन उनका दावा है कि इसके बदले उन्होंने कोई सौदा नहीं किया। रावत इस पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ सुनियोजित प्रयास के रूप में पेश कर रहे हैं।
मां की तस्वीर के जरिए दिया भावनात्मक संदेश
ED कार्यालय जाते समय मां की तस्वीर गले में डालने को हरीश रावत के हाल के बयानों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहले मां की सौगंध लेकर अपने ऊपर लग रहे आरोपों का जवाब और अब मां की तस्वीर साथ लेकर ED कार्यालय पहुंचना, दोनों घटनाओं में उन्होंने मां को अपने विश्वास और नैतिक संबल के रूप में सामने रखा है।






