देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम मुश्किलें बढ़ा सकता है। अगले 48 घंटे प्रदेश के लिए अहम रहने वाले हैं। मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक 26 सितंबर को पांच जिलों में रेड अलर्ट रहेगा, जबकि 27 सितंबर को बारिश का ज्यादा असर देहरादून समेत चार जिलों में देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने 26 सितंबर को उत्तराखंड में अत्यधिक भारी और 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है।
बिगड़ते मौसम को देखते हुए शासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन से स्थिति की जानकारी लेते हुए संबंधित जिलों और विभागों को पूरी सतर्कता बरतने को कहा है। रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के साथ राहत एवं बचाव से जुड़े संसाधनों को पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
26 सितंबर को कुमाऊं पर ज्यादा असर
26 सितंबर को बारिश का सबसे ज्यादा असर कुमाऊं क्षेत्र में पड़ने की आशंका है। बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर को रेड अलर्ट पर रखा गया है।
वहीं देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा के लिए ऑरेंज अलर्ट है। हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल में येलो अलर्ट रहेगा।
IMD के 25 सितंबर को जारी पूर्वानुमान में भी 26 सितंबर को उत्तराखंड में Extremely Heavy Rain के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है।
27 सितंबर को देहरादून समेत चार जिले रेड अलर्ट पर
एक दिन बाद यानी 27 सितंबर को बारिश का प्रभाव गढ़वाल के कई जिलों की तरफ बढ़ने का अनुमान है। इस दिन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग ऑरेंज अलर्ट पर रहेंगे। बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट रहेगा। मौसम विभाग का राज्यस्तरीय पूर्वानुमान 27 सितंबर को उत्तराखंड में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दे रहा है। पहाड़ों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने का खतरा
भारी बारिश के दौरान सबसे ज्यादा चिंता पर्वतीय इलाकों को लेकर है। लगातार या तेज बारिश होने पर भूस्खलन, पहाड़ से मलबा और पत्थर गिरने तथा सड़कों के बंद होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। नदी-नालों और गाड़-गदेरों का जलस्तर भी अचानक बढ़ सकता है। मैदानी क्षेत्रों में जलभराव परेशानी बढ़ा सकता है।
चारधाम यात्रा से जुड़े मौसम पूर्वानुमान में भी 26 और 27 सितंबर को बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी दी गई है।
JCB और राहत-बचाव टीमों को तैयार रखने के निर्देश
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने सभी 13 जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की है। संवेदनशील सड़कों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में मशीनरी तैयार रखने को कहा गया है, ताकि सड़क बंद होने पर जल्द से जल्द मलबा हटाया जा सके।
जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को 24 घंटे सक्रिय रखने के साथ पुलिस, SDRF, अग्निशमन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पेयजल और विद्युत विभाग के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने भी मौसम की स्थिति और विभागीय तैयारियों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए भी सतर्कता
चारधाम यात्रा मार्गों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी मौसम को देखते हुए विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। पर्वतीय रास्तों पर मौसम और सड़क की स्थिति के अनुसार ही यातायात संचालित करने तथा अत्यधिक बारिश और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।
आम लोगों को भी नदी-नालों, बरसाती धाराओं और भूस्खलन संभावित स्थानों से दूर रहने को कहा गया है। किसी आपात स्थिति में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र 1070, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र 1077 और आपातकालीन सेवा 112 से संपर्क किया जा सकता है।






