ऋषिकेश। लंबे इंतजार के बाद गंगा में शुरू हुआ राफ्टिंग का रोमांच महज दो दिन में ही थम गया। मानसून के कारण लंबे समय से बंद राफ्टिंग को 24 सितंबर से दोबारा शुरू किया गया था, लेकिन उत्तराखंड में मौसम को लेकर जारी चेतावनी के बाद गंगा में राफ्टिंग गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इससे वीकेंड पर ऋषिकेश पहुंचकर राफ्टिंग की योजना बनाने वाले पर्यटकों को भी झटका लगा है।
मानसून के बाद गंगा का जलस्तर सामान्य होने पर राफ्टिंग दोबारा शुरू करने की तैयारी की गई थी। विभागीय टीम ने मरीन ड्राइव से मुनिकीरेती के खारास्रोत तक करीब 25 किलोमीटर के राफ्टिंग स्ट्रेच की रैकी की थी। पांच राफ्ट और 15 कयाक के जरिए नदी के बहाव, जलस्तर और रैपिड्स की स्थिति जांची गई थी। जांच के दौरान जलस्तर राफ्टिंग के अनुकूल पाया गया था।
24 सितंबर को शुरू हुई, दो दिन बाद फिर रोक
मानसून के दौरान जुलाई-अगस्त में गंगा में राफ्टिंग बंद रहती है। इस बार सितंबर में भी लगातार बारिश के कारण गंगा का जलस्तर अधिक रहने से राफ्टिंग की शुरुआत सामान्य समय से देर से हुई। संयुक्त रैकी के बाद परिस्थितियां अनुकूल मिलने पर संचालन शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और 24 सितंबर से पर्यटकों के लिए राफ्टिंग शुरू हुई। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। मौसम की परिस्थितियां दोबारा बदलने और भारी बारिश की चेतावनी के चलते सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राफ्टिंग गतिविधियां रोक दी गईं।
लगातार बिगड़ रहे मौसम ने बढ़ाई चिंता
उत्तराखंड में बारिश को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलने की आशंका बनी हुई है। IMD के ताजा सेक्टर नाउकास्ट में ऋषिकेश से आगे पर्वतीय क्षेत्रों के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की चेतावनी दर्ज की गई है। ऋषिकेश-रुद्रप्रयाग सेक्टर के लिए बारिश के साथ तेज आंधी-तूफान की संभावना भी जताई गई है।
पहाड़ों में तेज बारिश होने पर उसका असर गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर और बहाव पर पड़ सकता है। ऐसे में राफ्टिंग जैसे साहसिक खेल में सुरक्षा को देखते हुए नदी की परिस्थितियों का लगातार आकलन जरूरी हो जाता है।
मानसून के बाद देर से शुरू हुआ इस बार का सीजन
आमतौर पर मानसून खत्म होने के बाद सितंबर में ऋषिकेश क्षेत्र में राफ्टिंग दोबारा शुरू हो जाती है। इस साल सितंबर में लगातार बारिश के कारण गंगा का जलस्तर अधिक बना रहा और संचालन शुरू करने में देरी हुई।
19 सितंबर को हुई संयुक्त रैकी में वन विभाग मुनिकीरेती-नरेंद्रनगर, आईटीबीपी शिवपुरी, सिंचाई विभाग नरेंद्रनगर और गंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति की टीम शामिल थी। टीम ने मरीन ड्राइव से खारास्रोत तक नदी की स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद जलस्तर को राफ्टिंग के अनुकूल बताया गया।
पर्यटकों को दोबारा संचालन शुरू होने का इंतजार
राफ्टिंग ऋषिकेश के साहसिक पर्यटन की प्रमुख गतिविधियों में शामिल है। पिछले सीजन में 3.80 लाख से अधिक पर्यटकों ने राफ्टिंग की थी। देवप्रयाग से मुनिकीरेती के बीच 576 राफ्टों के संचालन की अनुमति होने की जानकारी भी सामने आई थी।
फिलहाल पर्यटकों को मौसम और नदी की परिस्थितियां अनुकूल होने तथा प्रशासन की अनुमति मिलने का इंतजार करना होगा। राफ्टिंग दोबारा कब शुरू होगी, इसका फैसला नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति को देखते हुए किया जाएगा।






