कोलकाता। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक विशाल और भव्य समारोह के दौरान राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता मंच पर मौजूद रहे। विधानसभा चुनावों में मिली प्रचंड जीत के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह भाजपा के लिए न केवल एक राज्य की सत्ता हासिल करने जैसा है, बल्कि यह बंगाल की वैचारिक राजनीति में आए एक बड़े बदलाव का भी प्रतीक है।
शुभेंदु अधिकारी के साथ ही भाजपा के कई वरिष्ठ चेहरों ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली, जिससे यह साफ हो गया है कि नई सरकार में अनुभव और क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा गया है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जनता को संबोधित करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया और कहा कि अब बंगाल में भय और तुष्टिकरण की राजनीति का अंत हो गया है।
उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य राज्य में कानून-व्यवस्था को बहाल करना और उन केंद्रीय योजनाओं को तत्काल प्रभाव से लागू करना है, जो अब तक राजनीतिक अवरोधों के कारण बंगाल की जनता तक नहीं पहुंच पाई थीं। उन्होंने ‘सोनार बांग्ला’ के अपने संकल्प को दोहराते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का वादा किया।
सत्ता के इस बड़े फेरबदल के साथ ही बंगाल में करीब डेढ़ दशक से चले आ रहे तृणमूल कांग्रेस के शासन का अंत हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना उनके जमीनी संघर्ष और संगठन पर मजबूत पकड़ का परिणाम है। नंदीग्राम से लेकर कोलकाता तक उन्होंने जिस तरह से भाजपा के पक्ष में माहौल तैयार किया, उसी का नतीजा है कि आज भाजपा 200 से अधिक सीटों के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल रही है। नई सरकार के सामने अब राज्य के कर्ज को कम करने, बंद पड़े उद्योगों को पुनर्जीवित करने और चुनावी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने जैसी कठिन चुनौतियां हैं।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुआ शपथ ग्रहण समारोह
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह रही कि शपथ ग्रहण के लिए राजभवन के बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड को चुना गया, जहाँ लाखों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने भाजपा के प्रति जनसमर्थन का प्रदर्शन किया। नई कैबिनेट में आदिवासी, दलित और ओबीसी चेहरों को प्रमुखता दी गई है, जिससे भाजपा ने अपने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को धरातल पर उतारने की कोशिश की है।
पहली कैबिनेट में एसटीएफ के गठन का संकेत
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्यभार संभालते ही पहली कैबिनेट बैठक में भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स के गठन का संकेत दिया है। बंगाल की राजनीति का यह नया अध्याय अब विकास और केंद्र-राज्य समन्वय के एक नए युग की ओर इशारा कर रहा है।





