नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एनएस राजा सुब्रमणि को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है। उनके साथ ही वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया प्रमुख बनाए जाने का फैसला भी लिया गया है। इन नियुक्तियों को भारत की सैन्य रणनीति, थिएटराइजेशन और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन की दिशा में अहम माना जा रहा है।
एनएस राजा सुब्रमणि वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। इससे पहले वे भारतीय सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रह चुके हैं। करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें पाकिस्तान और चीन से जुड़े सामरिक मामलों का गहरा जानकार माना जाता है।
तमिलनाडु से संबंध रखने वाले राजा सुब्रमणि ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। दिसंबर 1985 में उन्हें गढ़वाल राइफल्स की आठवीं बटालियन में कमीशन मिला। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने खड़गा कोर, उत्तरी कमान और केंद्रीय कमान जैसी अहम जिम्मेदारियों का नेतृत्व किया।
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, राजा सुब्रमणि 30 मई 2026 के बाद कार्यभार संभालेंगे और वे रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। वे जनरल अनिल चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा है।
दूसरी ओर, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान में पश्चिमी नौसेना कमान का नेतृत्व कर रहे हैं और 31 मई को एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की जगह पदभार ग्रहण करेंगे। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सैन्य मामलों के जानकारों का मानना है कि नए CDS के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने, संयुक्त थिएटर कमांड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य ढांचे को मजबूत करने की होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा आधुनिकीकरण और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा उत्पादन पर विशेष जोर दिया है, ऐसे में नई नियुक्तियों को इसी रणनीतिक दिशा की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।






