देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में ऊर्जा बचत, कृषि सुधार, चिकित्सा शिक्षा, पर्यटन और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती ईंधन लागत एवं आर्थिक दबाव का उल्लेख करते हुए राज्य में ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए व्यापक कदम उठाने की घोषणा की। कैबिनेट ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधारों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया।
◼ ऊर्जा बचत के लिए बड़ा अभियान
सरकार ने सरकारी विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र में वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया है। सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहन बेड़े में वाहनों की संख्या आधी की जाएगी, जबकि एक से अधिक विभाग संभालने वाले अधिकारी एक दिन में केवल एक वाहन का उपयोग करेंगे। सरकारी और निजी भवनों में एसी के सीमित उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
◼ इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा पर जोर
कैबिनेट ने जल्द प्रभावी ईवी पॉलिसी लाने का निर्णय लिया। नए सरकारी वाहनों में 50 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्य होंगे। राज्यभर में ईवी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाएगा। साथ ही पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर, पीएनजी कनेक्शन और गोबर गैस परियोजनाओं को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।
◼ “मेरा भारत, मेरा योगदान” अभियान
राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए “Made in State” अभियान चलाएगी। सरकारी खरीद में “Make in India” नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने, ईंधन बचाने और अनावश्यक सोने की खरीद सीमित करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
◼ कम तेल वाले भोजन को बढ़ावा
स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में खाद्य तेल की खपत कम करने की समीक्षा होगी। होटल, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को “लो ऑयल मेन्यू” अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार इसे स्वास्थ्य सुधार और आयातित खाद्य तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
◼ प्राकृतिक खेती और किसानों पर फोकस
किसानों को प्राकृतिक खेती, जीरो बजट फार्मिंग और बायो-इनपुट्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
कैबिनेट का बड़ा फैसला: पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी नीति लागू
कैबिनेट ने “उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” को मंजूरी दे दी। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 11 पर्वतीय जिलों के 275 गांवों को चकबंदी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे बिखरी कृषि भूमि एकीकृत होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और पलायन रोकने में मदद मिलेगी।
◼ चकबंदी नीति की प्रमुख बातें
चकबंदी के लिए विवाद रहित गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी। न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि अथवा 25 खाताधारकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल नक्शों के माध्यम से संचालित की जाएगी तथा आपत्तियों के निस्तारण के लिए 120 दिन की समयसीमा तय की गई है।
◼ स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा को मजबूती
राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर फैकल्टी नियुक्ति की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का पुनर्गठन करते हुए 40 पदों को मंजूरी दी गई। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 277 कार्मिकों को समान कार्य-समान वेतन देने का निर्णय भी लिया गया। इसके अलावा लैब टेक्नीशियन संवर्ग के 345 पद पुनर्गठित किए गए हैं।
◼ पर्यटन और होमस्टे नियमों में बदलाव
सरकार ने पर्यटन यात्रा व्यवसाय पंजीकरण नियमावली में संशोधन करते हुए होमस्टे में कमरों की सीमा 5 से बढ़ाकर 8 कर दी है। ऑनलाइन फीस जमा होने पर ऑटोमैटिक रिन्यूअल की व्यवस्था लागू होगी। राज्य में डेस्टिनेशन वेडिंग, धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया गया।
◼ पंचायत भवन निर्माण के लिए बजट दोगुना
पंचायतीराज विभाग के अंतर्गत पंचायत भवन निर्माण की राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये प्रति पंचायत भवन कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी।
◼ अन्य महत्वपूर्ण फैसले
कैबिनेट ने लघु जल विद्युत परियोजना नीति में संशोधन, विधि विज्ञान प्रयोगशाला में 15 नए पद सृजित करने, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में 16 पदों की स्वीकृति और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की ऑनलाइन मान्यता व्यवस्था को भी मंजूरी प्रदान की।






