मसूरी। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में 2024 बैच के प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों के प्रशिक्षण के दूसरे चरण के समापन समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने युवा प्रशासनिक अधिकारियों को लोक सेवा का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी अपने पद को अधिकार का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने अधिकारियों से ‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’ को अपने कार्य का मार्गदर्शक मंत्र बनाने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई देते हुए कहा कि भारत के विकास में सिविल सेवाओं की भूमिका बेहद अहम है। सरकार की नीतियां और योजनाएं कागज से निकलकर आम लोगों तक तभी प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं, जब प्रशासन उन्हें जमीन पर सही तरीके से लागू करता है। ऐसे में आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल प्रशासन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
विकसित भारत के लक्ष्य में IAS अधिकारियों की बड़ी भूमिका
सी. पी. राधाकृष्णन ने विकसित भारत@2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को विकसित बनाने की दिशा में होने वाला हर प्रयास समावेशी होना चाहिए। विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हैं।
उन्होंने युवा अधिकारियों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में यह सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों का लाभ बिना भेदभाव के पात्र लोगों तक पहुंचे।
‘सच्चा नेतृत्व शक्ति या पद से नहीं, नैतिकता से तय होता है’
उपराष्ट्रपति ने आईएएस प्रशिक्षुओं को नेतृत्व और प्रशासन में नैतिकता के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सच्चे नेतृत्व का आकलन किसी अधिकारी के पद या उसके पास मौजूद शक्ति से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में उसके नैतिक आचरण से होता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी के फैसलों का सीधा असर लाखों लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। ऐसे में निर्णय लेते समय व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर संविधान, कानून, सत्यनिष्ठा और जनहित को प्राथमिकता देना जरूरी है।
टीम की सफलता को व्यक्तिगत उपलब्धि से ऊपर रखें
प्रशासन में टीमवर्क को जरूरी बताते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों से व्यक्तिगत या समूह स्तर की उपलब्धियों के बजाय टीम उत्कृष्टता पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने मजबूत और समन्वित टीम तैयार करने, सहकर्मियों को प्रेरित करने और उनके साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से अपने पूर्ववर्तियों द्वारा स्थापित सफल कार्यप्रणालियों और अच्छे प्रशासनिक अनुभवों को आगे बढ़ाने की भी अपील की।
2024 बैच में 41 प्रतिशत महिला IAS अधिकारी
उपराष्ट्रपति ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 2024 बैच में करीब 41 प्रतिशत अधिकारी महिलाएं हैं। उन्होंने इसे नारी शक्ति का प्रभावशाली प्रमाण बताया।
उन्होंने कहा कि प्रतिभा किसी रूढ़ धारणा की मोहताज नहीं होती। दृढ़ संकल्प और मेहनत के दम पर महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश में हो रहे सामाजिक बदलाव का भी संकेत है।
AI से लेकर Blockchain तक, तकनीक अपनाने की सलाह
उपराष्ट्रपति ने बदलते तकनीकी दौर के अनुरूप प्रशासनिक अधिकारियों को खुद को तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि Artificial Intelligence, Natural Language Processing, Machine Learning और Blockchain जैसी तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल प्रशासन को ज्यादा पारदर्शी, तेज और नागरिक-केंद्रित बना सकता है।
उन्होंने अधिकारियों से लगातार सीखते रहने और नई तकनीकों को समझने की अपील की। उनका कहना था कि भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिकारियों को पारंपरिक प्रशासनिक अनुभव के साथ तकनीकी दक्षता भी हासिल करनी होगी।
‘हर शिकायत सुनी जाए, हर नागरिक सशक्त हो’
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में लोक सेवा के मूल उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रशासन की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना आम नागरिक के जीवन में आने वाला बदलाव है।
उन्होंने प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों से देश के दूरदराज के इलाकों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ऐसा होना चाहिए जहां हर शिकायत सुनी जाए और हर नागरिक खुद को सशक्त महसूस करे।
उन्होंने युवा अधिकारियों से अपील की कि वे अपने कार्यकाल को केवल एक सरकारी सेवा के रूप में न देखें, बल्कि इसे देश और समाज में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाने के अवसर के रूप में लें।
उत्तराखंड के राज्यपाल और मंत्री भी रहे मौजूद
LBSNAA मसूरी में आयोजित प्रशिक्षण के दूसरे चरण के समापन समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण तथा सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और LBSNAA के निदेशक डॉ. बी. राजेंद्र समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






