Thursday, April 23, 2026
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महिला दिवस पर विमर्श संवाद एवं सम्मान समारोह आयोजित, वक्ता बोले बेहतर समाज के लिए लिंगभेद मिटाना जरूरी

  • वरदान संस्था की ओर से आयोजित विमर्श संवाद एवं सम्मान समारोह में कई वक्ताओं ने रखी राय
  • शुक्रवार को चकराता रोड स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में आयोजित हुआ कार्यक्रम
  • विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए पांच महिलाओं को प्रदान किया गया महिला शक्ति सम्मान-2025

देहरादून। महिला दिवस के उपलक्ष्य में वरदान संस्था ने शुक्रवार को चकराता रोड स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में विमर्श संवाद एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया। मुख्य अतिथि पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि समय के साथ महिलाएं सशक्त हुई हैं लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। महिला सशक्तीकरण के प्रयास घर से शुरू होने चाहिए। जब तक घर में बेटे और बेटी के बीच लिंग के आधार पर भेदभाव होगा, तब तक महिला सशक्तीकरण के प्रयास सफल नहीं हो सकेंगे।
मुख्य अतिथि पद्मश्री बसंती बिष्ट, आईटीएम के चेयरमैन निशांत थपलियाल, शिक्षाविद डा. सुनील अग्रवाल, उद्यमी अनिल मारवाह, समाजसेवी राजेंद्र प्रसाद सती, कवियत्री डा. प्राची कंडवाल और वरदान के महासचिव अनिल चन्दोला ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रथम सत्र में आयोजित विमर्श संवाद में वक्ताओं ने सशक्त होती पहाड़ की महिलाएं बिषय पर परिचर्चा की। पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि जब उन्होंने जागर गायन की शुरूआत की, तब उन्हें कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ी। परिवार और समाज में तमाम लोगों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि आज हालात काफी बदल गए हैं। अब शिक्षा और करियर को लेकर होने वाला भेदभाव काफी कम हुआ है।
प्रसिद्ध प्रकाशक रानू बिष्ट ने कहा कि पहाड़ की महिलाओं के लिए चुनौतियां हर दौर में बहुत ज्यादा रही है। आज भी पहाड़ की लड़कियां स्कूल जाने से पहले घर के तमाम काम निपटाती हैं। स्कूल से लौटने के बाद भी उन्हें तमाम काम करने पड़ते हैं। उसके बावजूद पहाड़ में परीक्षा परिणाम में हमेशा छात्राएं ही अव्वल रहती हैं।

पहाड़ में महिलाओं की स्थिति पर क्या बोलीं पद्मश्री बसंती बिष्ट, यहां क्लिक करें…

वरिष्ठ पत्रकार व लेखिका डा. भारती आनंद अनंता ने कहा कि तमाम दुश्वारियों के बावजूद पहाड़ की महिलाओं ने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। संसाधनो की कमी के बावजूद महिलाएं न सिर्फ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं बल्कि कई क्षेत्रों में उन्होंने अपना वर्चस्व भी कायम किया है।
डा. प्राची कंडवाल ने कहा कि यूं तो हर महिला की उपलब्धि इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्हें कई मोर्चों पर एक साथ जूझना पड़ता है। लेकिन पहाड़ की महिलाओं की उपलब्धियां और भी ज्यादा विशेष हैं, क्योंकि उनकी दुश्वारियां अपेक्षाकृत बहुत ज्यादा है।
आईटीएम के चेयरमैन निशांत थपलियाल ने कहा कि महिलाओं के जीवन में बदलाव जरूर आया है लेकिन अभी बहुत कुछ बदलना बाकी है। हम खुद से, अपने घर से इसकी शुरूआत करें तो बदलाव जरूर आएगा। इस अवसर पर प्रधानाचार्या डा. अंजू गैरोला, रजिस्ट्रार रूचि थपलियाल, एचओडी पत्रकारिता एवं जनसंचार प्रियंक रतूड़ी, एनिमेशन सौम्य मोहन शर्मा, मैनेजमेंट एंड कॉमर्स डा. हर्षित गुप्ता, मानविकी स्वाति वर्मा, रितिका पुरी, अभिलाषा पंत, सोलानी रावत, श्याम दूबे, शिखर रस्तोगी समेत अन्य मौजूद रहे।

उत्कृष्ट कार्यों के लिए पांच महिलाओं का सम्मान
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए पांच महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। साहित्य व लेखन के लिए डा. प्राची कंडवाल, पत्रकारिता व शोधपरक लेखन के लिए डा. भारती आनंद अनंता, सफल उद्यमिता के लिए रानू बिष्ट, वीरता व साहस के लिए दीक्षा भाटी और उद्यमिता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण के लिए अंजली अंथवाल को वरदान संस्था की ओर से नारी शक्ति सम्मान-2025 प्रदान किया गया।

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