Thursday, July 23, 2026
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तिरुपति लडडू प्रसादम मामले में रूड़की की भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क कंपनी के घी को क्लीन चिट

रुड़की। कुछ समय पूर्व तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसादम के घी में एनीमल फैट (चर्बी) मिले होने के आरोपों के बाद देशभर में श्रद्धालु आक्रोशित हो उठे थे। उस समय रूड़की की प्रतिष्ठित भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क कंपनी भी मंदिर में घी सप्लाई कर रही थी। ऐसे में कंपनी के घी में भी चर्बी मिले होने का आरोप लगा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच में कंपनी के घी को क्लीन चिट मिली है। यह रिपोर्ट भी मामले की सुनवाई में शामिल कर ली गई है।

मामले की शुरुआत तब हुई, जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में तिरुपति में लड्डू बनाने के लिए पशुओं की चर्बी वाले घी का इस्तेमाल किया गया था। इस बयान ने करोड़ों भक्तों की भावनाओं को आहत किया, जिसके बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें सीबीआई व आंध्र प्रदेश पुलिस के दो-दो और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) का एक अधिकारी शामिल किया गया। इस विवाद में तमिलनाडु की एआर डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड के अलावा रुड़की की भोले बाबा डेयरी जैसी अन्य कंपनियों को साजिश के तहत बेवजह घसीटा गया। कंपनियों ने उस समय भी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का एक  साजिश बताया था।

NDDB Calf lab की रिपोर्ट के मुताबिक सैंपल को लैब द्वारा नहीं लिया गया, जिसके चलते यह रिपोर्ट कानूनी रूप से  वैध नहीं है। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने भी मामले में जांच अधिकारी को इस जांच के लिए अधिकृत नहीं पाया। अब तक भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी प्राइवेट लिमिटेड का कोई भी उत्पाद नमूना एफएसएसएआई में फेल नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने पुष्टि होने के बाद कंपनी के मालिक को रिहा कर दिया है।

उच्च गुणवत्ता के उत्पाद हैं कंपनी की पहचान

गौरतलब है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की किसी भी जांच में आज तक भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड का सैंपल फेल नहीं हुआ है। इसकी वजह कंपनी का गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में की टिप्पणी

मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपनी टिप्पणी की। एससी ने बीते 30 सितंबर को कहा था कि इस बात का कोई निश्चित प्रमाण नहीं है कि वाईएसआरसीपी के कार्यकाल के दौरान लड्डू में पशु वसा मिलाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा बिना ठोस सबूत के सार्वजनिक बयान देने पर भी सवाल उठाया था। कोर्ट ने कहा, “लैब रिपोर्ट में कुछ डिस्क्लेमर हैं। यह बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है। यदि आपने स्वयं जांच का आदेश दिया था, तो प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी?” अदालत की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि शुरुआती आरोप जल्दबाजी में और बिना पुख्ता आधार के लगाए गए थे।

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