Thursday, July 23, 2026
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उत्तराखंड में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की सुरक्षा पर सरकार सख्त, राज्यव्यापी फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान शुरू होगा

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानकों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों पर सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में फायर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार ने की।

बैठक में यह निर्देश दिया गया कि हर अस्पताल में हर माह इमरजेंसी ड्रिल अनिवार्य रूप से कराई जाए, और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट भी किया जाए। डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट कहा कि किसी भी अस्पताल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। बैठक में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अजय आर्य, दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य गीता जैन, उपसचिव जसंविदर कौर, सीएमएस डॉ. आर.एस. बिष्ट तथा यूपीआरएल (U.P.R.L.) के प्रतिनिधि समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

दून मेडिकल कॉलेज में सचिव के सख्त निर्देश

सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने दून मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करते हुए फायर सेफ्टी से जुड़ी कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि अग्नि सुरक्षा से संबंधित एनओसी (No Objection Certificate) शीघ्र जारी की जाए। उन्होंने अग्निशमन विभाग से भी आवश्यक कार्यवाही का अनुरोध किया।
सचिव ने यह भी कहा कि स्प्रिंकलर, मोटर्स और अन्य फायर उपकरणों की जांच कर उनका डेमो कराया जाए, ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। उन्होंने निदेशक चिकित्सा शिक्षा को आदेश दिया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में हर माह फायर मॉक ड्रिल कराई जाए।
कार्यदायी संस्था ने बैठक में जानकारी दी कि ओटी बिल्डिंग की फायर एनओसी 30 अक्टूबर 2025 तक और सीएसएसडी विभाग की एनओसी 30 नवम्बर 2025 तक हस्तांतरित कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री धामी बोले सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

“राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में फायर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। मरीजों और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी अस्पताल सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

सीएम के निर्देश पर पूरे प्रदेश में चल रहा अभियान

“मुख्यमंत्री के निर्देशन में पूरे राज्य में सुरक्षा जांच और फायर ड्रिल अभियान को तेज किया जा रहा है। हमने सभी जिला अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि वे हर अस्पताल में फायर सिस्टम की मजबूती, इमरजेंसी ड्रिल और सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करें। लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड के अस्पताल पूरी तरह सुरक्षित और आपात स्थितियों के लिए तैयार रहें।”

राज्यव्यापी फायर सेफ्टी अभियान की रूपरेखा

राज्य सरकार के अनुसार यह अभियान सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, मोटर्स और इमरजेंसी उपकरणों की कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी। हर महीने एक बार ड्रिल प्रैक्टिस आयोजित होगी और स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा, समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को भेजनी होगी।

अस्पतालों के लिए सख्त चेतावनी जारी

राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अस्पताल में सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी में लापरवाही पाए जाने पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होगी। अस्पताल प्रबंधन को हर हाल में निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी और सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन अनिवार्य होगा।

इस राज्यव्यापी पहल के माध्यम से सरकार ने यह दोहराया है कि मरीजों और चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान न केवल अस्पतालों की संरचनात्मक सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि आपातकालीन स्थितियों में तत्परता की संस्कृति भी विकसित करेगा।

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