Sunday, September 6, 2026
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रफ्तार के नए सौदागर मयंक यादव

मनोज चतुर्वेदी

क्रिकेट में पेस गेंदबाजी की बात है तो पिछले एक दशक में भारत ने इस क्षेत्र में खासी तरक्की की है। ईशांत शर्मा के बाद से शुरू हुए सिलसिले ने जसप्रीत बुमराह की सफलताओं के बाद इस क्षेत्र में खासी तरक्की देखी गई है। दो-तीन साल पहले उमरान मलिक के आईपीएल में सबसे तेज गेंद 153 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार निकालने के बाद अब इस साल लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए पदार्पण करने वाले मयंक यादव ने पंजाब किंग्स के खिलाफ 155.8 किमी. की रफ्तार निकालकर इस सत्र में अब तक के सबसे तेज गेंदबाज होने का गौरव हासिल कर लिया है। मयंक ने इस मैच में लगातार 150 किमी. से ऊपर की रफ्तार निकालकर लखनऊ को मैच जिताने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 27 रन देकर तीन विकेट लिए। उनकी गति के बारे में हारने वाली टीम के कप्तान शिखर धवन ने कहा कि मयंक की गति ने हमें सरप्राइज कर दिया।

हम सभी जानते हैं कि कुछ सालों पहले तक पेस गेंदबाजी की चर्चा होती थी, तो ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और वेस्ट इंडीज के गेंदबाजों की ही चर्चा हुआ करती थी, लेकिन बुमराह के आने के बाद से भारत भी इस क्षेत्र में लगातार उपलब्धियां हासिल करता रहा है। इससे प्रेरणा पाकर तमाम युवा इस क्षेत्र में सामने आ रहे हैं। पर हमें इन युवाओं के ग्रेजुएशन की व्यवस्था और बेहतर करने की जरूरत है। आईपीएल के माध्यम से ही दो-तीन साल पहले उमरान मलिक निकले थे। जम्मू-कश्मीर का यह पेस गेंदबाज अब तक भारतीय टीम का नियमित सदस्य नहीं बन सका है। अब मयंक यादव की गति की चर्चा तो हो रही है। पर जरूरत इन गेंदबाजों को भारतीय टीम तक पहुंचाने की है। अगर यह गेंदबाज खेलेंगे तो 150 किमी. से ज्यादा की गति निकालने वाले गेंदबाजों की लाइन लग सकती है। मयंक यादव इस बार के घरेलू सीजन की शुरुआत से ही बीसीसीआई चयनकर्ताओं के राडार पर आ गए हैं।

असल में देवधर ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें सुर्खियां दिलाई हैं। उन्होंने देवधर ट्रॉफी में 12 विकेट निकाले और संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछली टेस्ट सीरीज के दौरान उन्हें विराट कोहली, रोहित शर्मा और केएल राहुल को गेंदबाजी करने के लिए बुलाया गया था। यह सभी बल्लेबाज उनकी गेंदबाजी से प्रभावित भी हुए, लेकिन इसी दौरान पसली में फ्रेक्चर होने से वह रणजी सीजन में नहीं खेल सके। एलएसजी के सहायक कोच विजय दहिया की निगाह मयंक पर पड़ी और उन्होंने तत्काल गौतम गंभीर से बात करके उन्हें 2022 की नीलामी में 20 लाख रुपए में खरीद लिया।

पर वह चोटिल होने की वजह से 2023 के आईपीएल सीजन में नहीं खेल सके, लेकिन अब वह एक ही प्रदर्शन से सभी की आंखों का तारा बन गए हैं। मयंक के पिता प्रभु यादव बताते हैं कि वह बचपन से ही उसे वेस्टइंडीज के पेस गेंदबाज कर्टली एम्ब्रोस की कहानियां सुनाते थे कि उसकी गेंदबाजी की गति से विरोधी बल्लेबाजों के मन में डर बना रहता था। वह कहते हैं कि मैं उससे इसी तरह का गेंदबाज बनने के लिए कहता था। मयंक को गेंदबाजी में तेजी इसलिए भी भाती थी कि वह बचपन से ही एयरो प्लेन, सुपर बाइक जैसी तेज चीजों को पसंद करते थे। मयंक के 14 साल का होने पर वह उसे तारक सिन्हा संचालित सोनेट क्लब ले गए। वहां कोच देवेंद्र शर्मा ने उनके कॅरियर को शेप देने में अहम भूमिका निभाई। यह कहा जा रहा है कि पिता बचपन से ही चाहते थे कि उनका बेटा भी सचिन तेंदुलकर की तरह क्रिकेटर बने, जिससे उनका नाम भी दुनिया में फैल सके।

मयंक को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। वह स्कूल से लौटते ही गली में साथी बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने लगते। इसके बाद वह स्कूल की टीम से खेलने लगे। वह जब 14 साल की उम्र में सोनेट क्लब में शामिल हुए तो उनके कॅरियर को सही दिशा मिली। कोच शर्मा बताते हैं कि वह जब क्लब में ट्रायल में भाग लेने आया था, तब उसके पास सही स्पाइक्स भी नहीं थे। पर उसमें ट्रायल में भाग लेने वाले अन्य गेंदबाजों से तेजी ज्यादा थी। वह कहते हैं कि वह बहुत ही सामान्य लडक़ा है।

2021-22 के सत्र में जब पहली बार उसे विजय हजारे ट्रॉफी के लिए दिल्ली टीम में चुना गया, तो उसने क्लब में सभी सदस्यों को मिठाई खिलाई। वह याद करते हुए बताते हैं कि विजय हजारे ट्रॉफी के मैच में उसे आखिरी ओवर में तीन रन बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई और उसने दिल्ली को जिता दिया था। मयंक ने आईपीएल का पहला मैच खेलने के बाद कहा था कि मेरा पहला विकेट ही मेरे लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है। मयंक के प्रदर्शन पर पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने कहा कि जिस तरह शोएब अख्तर का नाम उनके शहर की मशहूर ट्रेन ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ रखा गया, उसी तरह मयंक दिल्ली से आता है तो उसका नाम ‘राजधानी एक्सप्रेस’ रखना चाहिए।

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