Sunday, September 6, 2026
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जिला पंचायत सीटों के लिए अनंतिम आरक्षण सूची जारी, चार अगस्त तक कर सकेंगे आपत्ति दाखिल

देहरादून। प्रदेश की 12 (हरिद्वार को छोड़कर) जिला पंचायत सीटों के लिए अनंतिम आरक्षण की सूची जारी कर दी गई है। इस पर दो से चार अगस्त तक आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। पांच अगस्त को आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। छह अगस्त को अंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित की जाएगी। पांच सीटें सामान्य महिला, एक सीट अनुसूचित जाति महिला, एक सीट अनुसूचित जाति, एक पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई हैं। वहीं चार सीटें सामान्य (अनारक्षित) हैं।

अनंतिम सूची के अनुसार, अल्मोड़ा, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल की जिला पंचायत सीट सामान्य महिला आरक्षित की गई हैं। बागेश्वर की सीट महिला (अनुसूचित जाति) के लिए आरक्षित है। पिथौरागढ़ की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई है। वहीं, ऊधमसिंह नगर की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। चम्पावत, चमोली, नैनीताल और उत्तरकाशी जिले की सीट सामान्य (अनारक्षित) हैं। पंचायती राज विभाग ने आपत्तियों को लेकर भी कार्यक्रम जारी कर दिया है।

आरक्षण जारी होने के साथ ही जोड़-तोड़ तेज

देहरादून। अनंतिम आरक्षण की सूची जारी होने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों ने जोड़-तोड़ तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि अनंतिम आरक्षण में बदलाव की संभावना बेहद कम है। ऐसे में यही अंतिम आरक्षण हो सकता है। संभावित प्रत्याशी अन्य जीते हुए जिला पंचायत सदस्यों को साधने की कोशिशों में जुट गए हैं। विशेषकर जीते हुए बागियों और निर्दलीय प्रत्याशियों को साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है।

कई दावेदारों के सपने टूटेंगे

अनंतिम आरक्षण में बदलाव नहीं हुआ तो कई बड़े दावेदारों के सपने टूटने तय है। इसमें प्रमुख नाम देहरादून से अभिषेक सिंह का शामिल है। अभिषेक बेशक पहली बार जिला पंचायत सदस्य बने हैं, लेकिन वह जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रमुख दावेदारों में शामिल रहे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के पुत्र अभिषेक ने बड़ी जीत के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की। लेकिन सीट महिला आरक्षित होने से फिलहाल उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी तर पहुंचने के लिए इंतजार करना होगा।

भाजपा-कांग्रेस ने किया प्रत्याशियों की जीत का दावा

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने समर्थित प्रत्याशियों की जीत का दावा किया है। दोनों पार्टियों के नेताओं के अनुसार, उनके ज्यादा समर्थित प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। वहीं, जो बागी होकर चुनाव जीते हैं, वह भी वापस पार्टी में आने को तैयार हैं। हालांकि नेताओं के इन दावों में कितनी सच्चाई है, इसका पता अध्यक्ष की ताजपोशी होने के बाद ही पता चलेगा।

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