Sunday, September 6, 2026
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इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल–2025 का भव्य शुभारंभ, यूकॉस्ट के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने भी रखी अपनी बात

पंचकूला (हरियाणा)/देहरादून। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार तथा विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में 6 से 9 दिसंबर 2025 तक दशहरा मैदान में आयोजित किए जा रहे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल–2025 का भव्य शुभारंभ हो गया है। फेस्टिवल का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया। देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के साथ यह महोत्सव विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारत की प्रगति को सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रहा है।

फेस्टिवल के दूसरे दिन साइंस एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल मीट का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया। इस बैठक में देश के 28 राज्यों की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषदों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर अपने-अपने राज्यों की कार्ययोजनाओं, उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप का विस्तार से प्रस्तुतीकरण किया। बैठक के दौरान नवाचार, स्टार्टअप संवर्धन, अनुसंधान सहयोग और स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ।

उत्तराखंड की ओर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यू-कॉस्ट) का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. आशुतोष मिश्रा ने किया। उन्होंने परिषद द्वारा संचालित योजनाओं, शोध गतिविधियों तथा राज्य में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. मिश्रा ने अपने उद्बोधन में जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे संभावनाशील राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की वास्तविक मजबूती तभी संभव है, जब राज्य में शोध एवं विकास अवसंरचना, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और पेटेंट केंद्रों को और अधिक सशक्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों, जैव विविधता, औषधीय पौधों, जल संसाधनों, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान की असीम संभावनाएं हैं। यदि इन क्षेत्रों में केंद्र सरकार के सहयोग से मजबूत शोध ढांचा विकसित किया जाए, तो उत्तराखंड न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।

डॉ. मिश्रा ने जानकारी दी कि उत्तराखंड में महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के निर्देशन में यू-कॉस्ट कई नई योजनाओं पर प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है, जिनमें छात्र-छात्राओं में वैज्ञानिक चेतना का प्रसार, नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहन, स्टार्टअप सहयोग और शोधार्थियों को वित्तीय सहायता जैसी पहलें शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब उत्तराखंड राज्य की अपनी विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति भी अस्तित्व में आ चुकी है, जिससे राज्य को दीर्घकालिक रूप से अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई दिशा मिलेगी।

इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न राज्यों के परिषद प्रमुखों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं की उपस्थिति रही। बैठक के अंत में सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने आपसी सहयोग, संसाधन साझेदारी और संयुक्त शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल–2025 के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि विज्ञान और तकनीक ही विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं, और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से यह लक्ष्य और अधिक सशक्त रूप में साकार किया जा सकेगा।

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