Sunday, September 6, 2026
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सिर्फ यात्रा ही सुगम नहीं करेगा, वन्य जीवों का सुरक्षा कवच भी बनेगा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर

देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को जिस दिल्ली–दून एक्सप्रेस-वे को जनता को समर्पित करेंगे, वह सिर्फ यात्रा ही सुगम नहीं करेगा बल्कि वन्य जीवों के लिए सुरक्षा कवच भी बनेगा। यहां निर्मित करीब 12 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ मार्ग माना जा रहा है, जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इसके निर्माण से मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव में कमी आने की प्रबल संभावना जताई गई है।

सोमवार को वन मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन क्षेत्र से होते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व और देहरादून वन प्रभाग के घने जंगलों को जोड़ती है। एक्सप्रेस-वे का लगभग 20 किलोमीटर हिस्सा संवेदनशील वन क्षेत्र से गुजरता है, जिसे ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से यह एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया गया है, ताकि वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही बनी रहे।

परियोजना के तहत 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है, जिसमें लगभग 1.95 लाख पौधे लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देश पर 40 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट से इको-रेस्टोरेशन के कार्य भी किए जा रहे हैं। इसके अलावा, कॉरिडोर में हाथियों के लिए अंडरपास और अन्य वन्यजीव मार्ग बनाए गए हैं, साथ ही साउंड और लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं, जिससे शोर और प्रकाश प्रदूषण का असर न्यूनतम रहे।

वन मंत्री के अनुसार, यह कॉरिडोर न केवल वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करेगा, बल्कि जैव विविधता को भी मजबूत करेगा, क्योंकि इससे विभिन्न प्रजातियों के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान संभव होगा। अनुमान है कि अगले 20 वर्षों में इस परियोजना से लगभग 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो 60 से 68 लाख पेड़ों के बराबर कार्बन अवशोषण के समान है। साथ ही लगभग 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।

परियोजना के निर्माण में आधुनिक तकनीक के उपयोग से पर्यावरण को बड़ा लाभ हुआ है। जहां शुरुआत में करीब 45 हजार पेड़ों के कटान की आशंका जताई गई थी, वहीं उन्नत तकनीकों के कारण 33,840 पेड़ों को बचा लिया गया। अंततः केवल 11,160 पेड़ों की कटाई करनी पड़ी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।यह कॉरिडोर भविष्य में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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