अनिल चन्दोला
देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है। मैदानी शहरों से लेकर पर्वतीय पर्यटन स्थलों और चारधाम यात्रा मार्गों तक वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई स्थानों पर कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लग रहे हैं। पर्यटन सीजन, सप्ताहांत और धार्मिक आयोजनों के दौरान यह समस्या और विकराल हो जाती है।
कुछ समय पहले तक यह ट्रैफिक जाम की समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित थी। लेकिन पिछले कुछ समय में छोटे शहरों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और यात्रा मार्ग पर यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। इसके कारण पर्यटन प्रदेश की राज्य की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। घंटों सड़क पर जाम से जूझते पर्यटक और स्थानीय लोग सरकार से इसका एक स्थाई समाधान ढूंढने की मांग कर रहे हैं।
देहरादून: राजधानी की सड़कों पर रोजाना परीक्षा
राजधानी देहरादून वर्षों से बढ़ते वाहनों और सीमित सड़क क्षमता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। शहर के आईएसबीटी, घंटाघर, राजपुर रोड, बल्लूपुर चौक, प्रेमनगर, रिस्पना और हरिद्वार रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर सुबह और शाम लंबा जाम आम बात बन चुका है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वीआईपी मूवमेंट या विशेष आयोजनों के दौरान प्रशासन को अलग से ट्रैफिक प्लान लागू करना पड़ता है। हाल के महीनों में भी कई अवसरों पर विशेष डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई।
ऋषिकेश: चारधाम यात्रा का सबसे बड़ा दबाव
चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले ऋषिकेश में स्थिति सबसे चुनौतीपूर्ण दिखाई देती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहीं से बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ओर बढ़ते हैं। यात्रा सीजन में शहर की सड़कें वाहनों से भर जाती हैं। मुनिकीरेती, तपोवन, आईएसबीटी क्षेत्र, नेपाली फार्म और चंद्रभागा पुल के आसपास अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों को भी घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है।
हरिद्वार: आस्था और ट्रैफिक का टकराव
हरिद्वार में धार्मिक आयोजनों, गंगा स्नान, सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। हर की पैड़ी, चंडी चौक, दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और शहर के प्रवेश मार्गों पर अक्सर यातायात धीमा पड़ जाता है। चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन में यह दबाव और बढ़ जाता है क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहीं से पहाड़ों की ओर प्रस्थान करते हैं।
मसूरी: ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ की रफ्तार थमी
उत्तराखंड में ट्रैफिक जाम की चर्चा मसूरी के बिना अधूरी है। गर्मियों और छुट्टियों के मौसम में देहरादून से मसूरी तक का सफर कई बार दोगुना-तिगुना समय लेने लगता है। टिहरी बाईपास, लाइब्रेरी चौक, माल रोड और कंपनी गार्डन क्षेत्र प्रमुख जाम बिंदु बन चुके हैं। हाल ही में प्रशासन को जाम कम करने के लिए विशेष कदम उठाने पड़े और माल रोड क्षेत्र में वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था पर काम शुरू किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार छुट्टियों के दौरान पर्यटकों को घंटों जाम झेलना पड़ा और टिहरी बाईपास सबसे बड़ा बाधा बिंदु बनकर उभरा है।
नैनीताल: झील नगरी की सबसे बड़ी चुनौती
नैनीताल में पार्किंग क्षमता सीमित है जबकि पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सप्ताहांत और पर्यटन सीजन में काठगोदाम से लेकर शहर के प्रवेश मार्गों तक वाहनों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं। मॉल रोड, तल्लीताल और मल्लीताल क्षेत्र में जाम की समस्या वर्षों से बनी हुई है। कई बार पर्यटकों को शहर में प्रवेश करने से पहले ही लंबा इंतजार करना पड़ता है।
कैंची धाम: आस्था के बढ़ते कदम, सड़कें हुईं छोटी
नीम करौली बाबा के प्रसिद्ध कैंची धाम में पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। विशेष अवसरों और सप्ताहांत पर भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। मंदिर तक पहुंचने में कई बार घंटों लग जाते हैं। स्थानीय प्रशासन को बार-बार यातायात प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है, लेकिन बढ़ती भीड़ के सामने मौजूदा ढांचा अपर्याप्त साबित हो रहा है।
हल्द्वानी: कुमाऊं का प्रवेश द्वार दबाव में
हल्द्वानी कुमाऊं मंडल का सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र और पर्वतीय जिलों का प्रवेश द्वार है। नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जाने वाले अधिकांश वाहन इसी शहर से होकर गुजरते हैं। रोडवेज स्टेशन, तीनपानी, कालाढूंगी रोड और मुखानी क्षेत्र में रोजाना लंबा ट्रैफिक दबाव देखने को मिलता है। त्योहारों और पर्यटन सीजन में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
रुद्रपुर: औद्योगिक विकास के साथ बढ़ी समस्या
उधमसिंह नगर का औद्योगिक केंद्र रुद्रपुर भी अब ट्रैफिक जाम की समस्या से अछूता नहीं है। औद्योगिक इकाइयों, मालवाहक वाहनों और तेजी से बढ़ती आबादी के कारण शहर की सड़कें क्षमता से अधिक दबाव झेल रही हैं। प्रमुख चौराहों पर सुबह और शाम लंबी कतारें आम हो चुकी हैं।
चारधाम मार्ग के अन्य पड़ाव भी प्रभावित
चारधाम यात्रा मार्ग पर श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, सोनप्रयाग, जोशीमठ और उत्तरकाशी जैसे कई स्थानों पर भी यात्रा सीजन में भारी दबाव देखा जाता है। सड़कें संकरी होने और वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण कई बार यातायात घंटों तक प्रभावित रहता है। भूस्खलन या सड़क अवरोध की स्थिति में समस्या और गंभीर हो जाती है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है जाम?
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार समस्या के पीछे कई कारण हैं। मुख्य तौर पर वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या, सीमित पार्किंग, संकरी सड़कें, पर्यटन और तीर्थाटन में रिकॉर्ड वृद्धि, सार्वजनिक परिवहन की कमी तथा शहरी विस्तार के कारण दिक्कत बढ़ी है। उत्तराखंड पर्यटन के नए रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन सड़क अवसंरचना उसी गति से विकसित नहीं हो पाई है, जिसके कारण समस्या दिन-ब-दिन विकराल रूप धारण करती जा रही है।
दीर्घकालीन समाधान खोजने की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश में परेशानी का सबब बन चुकी इस समस्या के लिए दीर्घकालीन समाधान खोजना होगा। पार्किंग हब, रोपवे, शटल सेवा, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वाहनों की संख्या नियंत्रित करने जैसे उपायों को अपनाने की जरूरत है। इसके अलावा वैकल्पिक सड़कों का विकास, प्रमुख शहरों में बायपास और रिंग रोड का निर्माण समय की आवश्यकता बन चुका है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो अगले कुछ वर्षों में समस्या और बढ़ जाएगी।
देवभूमि की सड़कों पर बढ़ता जाम अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यटन, तीर्थाटन, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी गंभीर चुनौती बन चुका है। यदि समय रहते दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान नहीं अपनाए गए तो उत्तराखंड की सबसे बड़ी पहचान, उसकी सहज और सुगम यात्रा लगातार प्रभावित होती रहेगी। इसके कारण स्थानीय लोगों और पर्यटकों सभी को परेशान होना पड़ेगा।
जगजीत सिंह, प्रसिद्ध यातायात विशेषज्ञ






