नई दिल्ली। उत्तर भारत की बहुप्रतीक्षित किसाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। विभिन्न कारणों से अटकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इस सहमति से करीब 11 वर्षों से रुकी परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में परियोजना से जुड़े वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी पक्षों ने परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का मानते हुए इसे आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इस परियोजना के निर्माण से उत्तराखंड और हिमाचल समेत सभी छह राज्यों को लाभ मिलेगा।
टोंस नदी पर बनेगा विशाल बांध
किसाऊ बांध परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है। यह एक बहुउद्देश्यीय परियोजना है, जिसका उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को मजबूत बनाना है।
परियोजना के तहत लगभग 660 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में जल भंडारण की सुविधा विकसित होने से उत्तर भारत के कई राज्यों को पेयजल और सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।
लाखों लोगों को मिलेगा फायदा
किसाऊ बांध के निर्माण से केवल उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को भी सीधा लाभ मिलेगा। परियोजना से लाखों लोगों के लिए पेयजल उपलब्धता बढ़ेगी, जबकि हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी और जल संकट की चुनौतियों को देखते हुए यह परियोजना उत्तर भारत की जल सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
वित्तीय विवाद बना था सबसे बड़ी बाधा
परियोजना का प्रस्ताव लंबे समय से मौजूद था, लेकिन लागत और वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर राज्यों के बीच मतभेद बने हुए थे। विशेष रूप से परियोजना के बिजली उत्पादन से जुड़े खर्चों और हिस्सेदारी के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही थी। इसी कारण परियोजना वर्षों तक आगे नहीं बढ़ सकी।
हालिया बैठक में इन मुद्दों पर समाधान निकालने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। इससे परियोजना को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद बढ़ गई है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति
किसाऊ बांध के निर्माण से जल और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव आने की संभावना है। परियोजना से एक ओर जहां बिजली उत्पादन बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर सिंचाई और पेयजल की बेहतर व्यवस्था से आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। इसके साथ ही निर्माण कार्य के दौरान रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना उत्तर भारत में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सहमति के बाद अब आगे क्या?
अब संबंधित राज्यों और एजेंसियों के बीच बनी सहमति के आधार पर परियोजना से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि सभी आवश्यक मंजूरियां और प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो लंबे समय से प्रतीक्षित किसाऊ बांध परियोजना जल्द ही धरातल पर उतर सकती है।
उत्तर भारत की जल, ऊर्जा और सिंचाई जरूरतों को देखते हुए इस परियोजना को आने वाले वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।






