Thursday, July 23, 2026
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पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून।

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचने की संभावना है। सरकार और प्रशासन पुख्ता तैयारियों का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस बार पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी यात्रा की परेशानियां बढ़ा सकती है। होटल, रेस्त्रां व ढ़ाबा स्वामियों के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसको लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।

चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालु पंजीकरण में जिस तरह का उत्साह दिखा रहे हैं, उससे साफ है कि संख्या पिछली बार से ज्यादा हो सकती है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर सुविधाएं और संसाधन बढ़ाने पर सरकार फोकस कर रही है। पिछली बार शुरूआत में भीड़ ज्यादा बढ़ने के कारण कई तरह की परेशानियां हुई थी। श्रद्धालुओं को कई-कई दिनों तक अलग-अलग पड़ाव पर रोकना पड़ा था। इसके अलावा ट्रैफिक मैनेजमेंट और जगह-जगह जाम की समस्या से भी लोगों को परेशान होना पड़ता है।

इसके अलावा हमेशा की तरह मौसम एक बड़ी चुनौती बनकर उभर सकता है। पहाड़ों में मौसम यात्रा का सबसे अनिश्चित और प्रभावी कारक बना रहता है। पहाड़ों में अचानक बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन न सिर्फ मार्ग बाधित करते हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी सीधा असर डालते हैं। कई बार घंटों नहीं, बल्कि दिनों तक यात्रा ठप होने की स्थिति बन जाती है। बारिश और आपदा के कारण कई बार यात्रा रोकनी पड़ती है। यह ज्यादा खतरनाक इसलिए भी है क्योंकि इसमें जानमाल की हानि भी होती है।

उच्च हिमालयी क्षेत्र और भारी भीड़भाड़ वाली यात्रा में स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी संवेदनशील कड़ी बनी हुई हैं। कई बार इसके कारण श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ती है। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी, अचानक तबीयत बिगड़ना और सीमित चिकित्सा संसाधन ये सभी मिलकर जोखिम बढ़ाते हैं। पर्याप्त मेडिकल स्टाफ और त्वरित रेस्पॉन्स सिस्टम की कमी श्रद्धालुओं पर भारी पड़ती है।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का दबाव भी कम नहीं है। भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के चलते कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बन जाता है। प्लास्टिक मुक्त यात्रा के दावों को जमीन पर उतारना प्रशासन के लिए हर साल मुश्किल साबित होता है। वैसे भी, सरकार ने इस बार ग्रीन और क्लीन यात्रा को अपनाने का संदेश दिया है।

इन सबके इतर इस बार रसोई गैस की किल्लत एक नई परेशानी का सबब बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विवाद के कारण व्यावसायिक रसोई गैस को लेकर दिक्कतें बढ़ी हैं। इससे चारधाम यात्रा मार्ग पर यात्रियों को भोजन के लिए परेशान होना पड़ सकता है। यात्रा मार्ग के दुकानदार, होटल, ढ़ाबा स्वामियों ने रसोई गैस के वैकल्पिक उपाय जैसे लकड़ी या ड़ीजल की भट्टी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। लेकिन, फिर भी वो मान रहे हैं कि रसोई गैस की किल्लत अगर जल्द समाप्त नहीं हुई तो यात्रा प्रभावित हो सकती है। वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों ने भी सरकार से रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

 

 

 

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