Monday, June 8, 2026
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दिल्ली की गोष्ठी में भोपाल सिंह चौधरी का तीखा बयान: “पर्यावरण के नाम पर सिर्फ खोखली बातें, अब जमीन पर संघर्ष जरूरी”

नई दिल्ली। दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित “हिमालय है तो हम हैं” विषयक गोष्ठी के दौरान वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता भोपाल सिंह चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हो रही दिखावटी गतिविधियों पर कड़ा प्रहार किया। भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में चौधरी ने कहा कि बीते दो दशकों में गंगा संरक्षण केवल औपचारिक गोष्ठियों और सेमिनारों तक सिमट गया है।

चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि “20 वर्षों में न गंगा अविरल हुई, न निर्मल। जो संत वास्तव में गंगा के लिए तप और संघर्ष कर रहे थे, प्रो. जी.डी. अग्रवाल और संत निगमानंद। उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिए, लेकिन सरकारों ने न उनके संदेश को समझा और न सम्मान दिया। यहाँ तक कि उनके अंतिम संस्कार में भी अड़चनें पैदा की गईं और हमें जेल तक भेज दिया गया।”

उन्होंने बताया कि मंचों से बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता निर्णायक क्षणों में कभी साथ नहीं आए। धारी देवी के मुद्दे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देवी की जलसमाधि रोकने के दौरान कई संत और नेता धरना स्थल पर आए, भाषण दिए, आश्वासन भी दिया, लेकिन जिस दिन देवी को डुबोया जा रहा था, उस दिन कोई सामने नहीं आया।

चौधरी ने कहा, “हम उस दिन रोते हुए सबको फोन कर रहे थे, लेकिन सबके फोन बंद थे। ईश्वर सब देखता है और उसी का परिणाम था कि धारी देवी के डूबते ही केदारनाथ सहित उत्तराखंड भीषण आपदा से गुजरा।”

गोष्ठी में उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि उत्तरकाशी में विकास के नाम पर बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों की कटाई की तैयारी हो रही है, जो हिमालय के लिए आने वाले वर्षों में गंभीर संकट का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि अब केवल चर्चाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर निर्णायक संघर्ष की जरूरत है।

“यदि आप सच में पर्यावरण के पक्षधर हैं, तो केवल मंचों पर भाषण देने से कुछ नहीं होगा। उत्तरकाशी के पेड़ों को बचाने के लिए हमारे साथ खड़े हों तभी आपकी गोष्ठियां सार्थक होंगी।” चौधरी के इस बेबाक और सख्त वक्तव्य ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को झकझोर दिया और हिमालयी पर्यावरण संरक्षण पर एक बार फिर गंभीर मंथन शुरू कर दिया।

गोष्ठी में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी, कश्मीर से डॉ. करण सिंह, मल्लिका भनोट, पूर्व कांग्रेस सांसद प्रदीप टम्टा, किशोर उपाध्याय, जसपाल चौहान, पूर्व आईएएस चंद्र कुमार शर्मा, विधायक विशन सिंह चुफाल, हेमंत ध्यानी, वरिष्ठ पत्रकार सुशील बहुगुणा, कर्नल कोठियाल सहित अनेक विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण चिंतकों ने भी अपने विचार रखे।

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