देहरादून। राष्ट्र की सेवा और देशभक्ति के जुनून से ओतप्रोत संदीप सर दून डिफेंस एकेडमी में 79वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। सहस्त्रधारा रोड स्थित त्रिशक्ति परिसर में अग्निवीर बने डीडीए डायमंड्स व प्रधानाचार्य एसके आर्य ने तिरंगा फहराया।
डीडीए निदेशक संदीप गुप्ता की ओर से डीडीए कमांडेंट कर्नल सुधीर वर्मा (सेनि) ने उदबोधन में कहा कि तिरंगा हमारी स्वतंत्रता, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है। साथ ही स्वाधीनता के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर सेनानियों का स्मरण भी किया गया।
वहीं, डीडीए की स्वर्णिम 21वीं वर्ष गांठ पर विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किये गए। प्रथम पग कोर्स-04 सत्र 2026-27 के एडमिशन के प्रारंभ होने की आधिकारिक रूप से घोषणा की गई। मर्चेंट नेवी विंग के शुभारंभ के साथ अमन वर्मा द्वारा तैयार की गई मर्चेंट नेवी की पुस्तक का विमोचन किया गया। डीडीए के चयनित छात्रों का नकद पुरस्कार से नवाजते हुए 14 सितंबर को होने वाले एनडीए व सीडीएस की लिखित परीक्षा की शुभकामनाओं के लिए छात्रों को मैजिक बॉल पेन व करंट अफेयर मैगजीन, के साथ मिष्ठान वितरण किया गया।
अग्निवीर बने डीडीए डायमंड्स को 10-10 हजार का नगद पुरस्कार
डीडीए की परंपरा के अनुसार अग्निवीर बने डीडीए डायमंड्स सुधांशु, बजरंग ज्यानी, प्रशांत, ओम जांगिद, परीक्षित चौहान, आरव मौ. व अमन पाल को 10-10 हजार रूपये नगद पुरस्कार से नवाजा गया। इस मौके पर फॉउंडेशन कोर्स प्रथम पग इंटर हाउस स्विमिंग कॉम्पिटिशन के विजेता कैडेट्स को मेडल पहना कर सम्मानित किया गया।
60 से ज्यादा कैडेट्स ने किया रक्तदान, कराई खून की जांच
श्री महंत इंद्रेश अस्पताल के द्वारा लगाए गए रक्तदान शिविर में छात्रों, स्टाफ व फैकल्टी ने 60 से ज्यादा यूनिट रक्तदान किया। डॉ लाल पैथलैब द्वारा लगाए गए रक्त जांच शिविर में 50 से ज्यादा ने जांच करवाई। इस मौके पर डीडीए के कमांडेंट कर्नल सुधीर वर्मा (सेनि), सेंटर हेड उमेश कुनियाल, एकेडमिक हेड उदय मेहरा, एसडीओ महावीर रावत, पीआरओ अनिल रावत, प्रथम पग के प्रधानाचार्य एसके आर्य के साथ समस्त फेकल्टी, स्टाफ व छात्र उपस्थित रहे।
पितृ शोक के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए संदीप सर
दून डिफेंस एकेडमी के निदेशक संदीप गुप्ता के पिता एनके गुप्ता का लंबी बीमारी के बाद 12 अगस्त 2025 को स्वर्गवास हो गया। यही कारण है कि निदेशक संदीप गुप्ता स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो पाए। उनके पिता बुद्धि, विनम्रता और दृढ़ मूल्यों के धनी थे। उन्होंने न केवल अपने परिवार को, बल्कि उन सभी को प्रेरित किया, जिन्हें उन्हें जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद सदैव सभी के लिए शक्ति का स्रोत बना रहेगा।






