Sunday, September 6, 2026
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आवाज सुनो पहाड़ों की ने किया दिवगंत लोक कलाकारों की याद में श्रद्धा सम्मान कार्यक्रम, परिजनों को किया सम्मानित

देहरादून। उत्तराखंड के दिवंगत लोक कलाकारों को श्रद्धांजलि देने और उनके योगदान को याद करने के उद्देश्य से तृतीय श्रद्धा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए शांति पाठ करने के साथ ही उनके गीतों के माध्यम से उन्हें याद भी किया गया। इस अवसर पर सात दिवंगत कलाकारों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में दिवगंत कलाकारों की याद में पौधे भी लगाए गए।

आवाज सुनो पहाड़ों की मंच की ओर से अजबपुर स्थित संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में तृतीय श्रद्धा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दिवंगत कलाकारों की याद में दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। सचिव संस्कृति विभाग युगल किशोर पंत, नगर आयुक्त ऋषिकेश गोपाल राम बिनवाल, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, लोकगायिका मीना राणा, आवाज सुनो पहाड़ों की मंच के अध्यक्ष बलवीर सिंह पंवार समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। 11 बटुक ब्राह्मणों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए गीता व वेद पाठ किया।

कार्यक्रम में दिवगंत लोक कलाकारों के परिजनों को किया सम्मानित
श्रद्धा सम्मान कार्यक्रम में स्व. गिरीश तिवारी गिर्दा, स्व. घन्नानंद गगोडिया घन्ना भाई, स्व. कबूतरी देवी, स्व. प्रह्लाद मेहरा, स्व. देवराज रंगीला, स्व. रामरतन काला, स्व. संतराम चौहान व स्व. गिरीश चंद्र इष्टवाल के परिजनों को सम्मानित किया गया। घन्ना भाई के पुत्र सुशांत व निशांत, कबूतरी देवी के परिजन नीरज, प्रह्लाद मेहरा के पुत्र कमल मेहरा, देवराज रंगीला के भतीजे वीरेंद्र सिंह नेगी, रामरतन काला की धर्मपत्नी कमला देवी, संतराम चौहान के पुत्र सियासिंह चौहान व पुत्रवधू शीतल चौहान और गिरीश चंद्र इष्टवाल की पत्नी शकुंतला इष्टवाल ने सम्मान ग्रहण किया।

अतिथियों ने की कार्यक्रम की सराहना

सचिव संस्कृति युगल किशोर पंत ने कहा कि दिवंगत कलाकारों को याद करने की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। साथ ही, उत्तराखंड के कलाकारों के कार्यों व उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करने का काम भी यह मंच कर रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रोत्साहित करेगा। गढ़गौरव नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि कलाकार ही लोक संस्कृति के सबसे बड़े संवाहक हैं। कलाकार जीवनभर लोक संस्कृति को बचाने, संरक्षित और संवर्धित करने के लिए कार्य करते हैं लेकिन निधन के बाद उन्हें भुला दिया जाता है। आवाज सुनो पहाड़ों की मंच ने उन्हें याद करने की जो पहल की है, वह आने वाले समय में एक अच्छी परंपरा बनेगी।

लोक संस्कृति संरक्षण के लिए जारी रहेंगे प्रयास
मंच के अध्यक्ष बलवीर सिंह पंवार ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रदेश की लोक संस्कृति, कला, शिल्प, वेशभूषा, खान-पान के संरक्षण के लिए मंच के स्तर से लगातार प्रयास जारी रहेंगे। कार्यक्रम संयोजक नरेंद्र रौथाण ने कहा कि संस्कृति के संरक्षण के बिना राज्य की अस्मिता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अपने सामाजिक व सांस्कृतिक पितरों को श्रद्धांजलि देने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

दिवंगत कलाकारों के गीत गाकर किया भावपूर्ण स्मरण

पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने अपनी सुमधुर आवाज में जागर के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद कलाकारों ने दिवंगत कलाकारों के गीत गाकर उन्हें याद किया। मीना राणा व वीरेंद्र नेगी ने स्व. चंद्र सिंह राही और कमल मेहरा ने अपने पिता स्व. प्रहलाद मेहरा के गीत गाकर उनका भावपूर्ण स्मरण किया। इसके अलावा  डा. नंदलाल भारती, कृष्णा बगोट,ओम बधाणी, शांति वर्मा, अंशु वर्मा, कुसुम नेगी, पूनम सती, विवेक नौटियाल, राजेश गौड़, अतुल नेगी व कृष्णा ने अपनी प्रस्तुतियों से खूब वाहवाही बटोरी।

कई गणमान्य अतिथि रहे कार्यक्रम में मौजूद
कार्यक्रम का संचालन अनिल चन्दोला ने किया। कार्यक्रम आयोजन में आवाज सुनो पहाड़ों की मंच के महासचिव अनुसूइया उनियाल, उपाध्यक्ष आनंद सिंह रावत, कार्यक्रम संयोजक नरेंद्र रौथाण, यशवंत उनियाल, पूजा चौहान, आरती बड़ोला, कौशल्या देवी समेत अन्य ने सहयोग दिया। इस अवसर पर संस्कृति कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, सुरेश भट्ट, वैभव गोयल, दिग्मोहन नेगी, शकुंतला इष्टवाल, रघुवीर बिष्ट, वीरेंद्र डंगवाल, कांता प्रसाद समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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