Wednesday, April 29, 2026
Home आर्टिकल किसान फिर सड़क पर

किसान फिर सड़क पर

किसान संगठन ‘दिल्ली चलो’ अभियान पर निकल पड़े हैं। इससे 2020 का नजारा फिर से सामने आ खड़ा हुआ है। तब आंदोलन से निपटने के सरकारी उपाय किसानों का हौसला तोडऩे में नाकाम रहे थे। क्या इस बार सरकार सफल होगी?

किसान संगठनों की मांगों का ना सिर्फ वर्तमान सत्ताधारी पार्टी, बल्कि आज की पूरी पॉलिटकल इकॉनमी के साथ तीखा अंतर्विरोध है। इसलिए इसमें कोई हैरत की बात नहीं कि चंडीगढ़ में तीन केंद्रीय मंत्रियों की टीम के साथ इन संगठनों की बातचीत नाकाम हो गई। दोनों पक्षों में सहमति सिर्फ तभी बन सकती है, जब उनमें से कोई अपने बुनियादी प्रस्थान बिंदु से हटने को तैयार हो। सरकार तो संभवत: तब तक ऐसा नहीं करेगी, जब तक किसान अपने आंदोलन को इतना बड़ा ना बना दें, जिसका असर सत्ताधारी दल की चुनावी संभावनाओं पर महसूस होने लगे। दूसरी तरफ सरकार की मौजूदा नीतियों से किसान और कृषि अर्थव्यवस्था जिस तरह बदहाल हो रहे हैं, उसके बीच इन संगठनों के पास भी लंबी लड़ाई लडऩे के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। यही कारण है कि लगभग दो साल के अंतराल के बाद फिर एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत हो गई है।

कई किसान संगठन मंगलवार को अपने ‘दिल्ली चलो’ अभियान पर निकल पड़े हैँ। इसके तहत हजारों किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर दिल्ली आने की तैयारी में हैं। इस बीच 16 फरवरी को किसान संगठन देश भर में ग्रामीण बंद का आयोजन करेंगे। उस रोज ट्रेड यूनियनें भी उनकी इस लड़ाई में शामिल होंगी। दस ट्रेड यूनियनों ने उस दिन हड़ताल पर जाने का एलान किया है। इस बीच दिल्ली प्रशासन ने किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। दिल्ली की सभी सीमाओं पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती गई है। सडक़ों पर सीमेंट के बैरिकेड, कंटीली तारें और नुकीले उपकरणों को लगा दिया गया है। दिल्ली में एक महीने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है, जिसके तहत किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन, जुलूस या यात्रा निकलना प्रतिबंधित कर दिया गया है। हरियाणा सरकार ने अलग से ऐसे उपाय किए हैं, जिससे किसानों को दिल्ली पहुंचने के पहले ही रोक दिया जाए। यानी 2020 का नजारा फिर से सामने आ खड़ा हुआ है। लेकिन तब ऐसे उपाय किसानों का हौसला तोडऩे में नाकाम रहे थे। क्या इस बार सरकार सफल होगी?

RELATED ARTICLES

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की न हो कमी, सीएम धामी ने की मांग

नई दिल्ली। नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने चारधाम...

विपक्ष ने आधी आबादी को हक दिलाने के प्रयास को विफल कर देश के साथ किया महापापः सीएम धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने हजारों...

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच श्रद्धालुओं के लिए खुले बदरीनाथ धाम के कपाट, चारधाम यात्रा के पकड़ी रफ्तार

बदरीनाथ। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक पूजा-विधि के साथ श्रद्धालुओं के...

हर-हर महादेव के जयकारों के बीच खुले केदारनाथ धाम के कपाट, प्रधानमंत्री मोदी के नाम से हुई पहली पूजा

रुद्रप्रयाग/देहरादून। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आज प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सुबह लगभग 8 बजे...

Recent Comments