Sunday, September 6, 2026
Home फीचर सरकारी दावों के विपरीत

सरकारी दावों के विपरीत

अगर आम जन की वास्तविक आय नहीं बढ़ती है, तो उनका उपभोग घटता है, जिसका असर बाजार में मांग पर पड़ता है और अंतत: यह स्थिति कारोबार जगत को प्रभावित करती है। अब ऐसा होने के साफ संकेत मिल रहे हैं। भारत में आर्थिक वृद्धि दर के लाभ आम जन तक नहीं पहुंच रहे हैं, इस बारे में तो पहले से पर्याप्त आंकड़े मौजूद रहे हैं। लेकिन अब व्यापार जगत का कारोबार भी मद्धम हो चला है, यह रोज-ब-रोज जाहिर हो रहा है। वैसे देखा जाए, तो इन दोनों परिघटनाओं में सीधा संबंध है। अगर आम जन की वास्तविक आय नहीं बढ़ती है, तो उनका उपभोग घटता है, जिसका असर बाजार में मांग पर पड़ता है और अंतत: यह स्थिति कारोबार जगत को प्रभावित करती है।

अब ऐसा होने के साफ संकेत मिल रहे हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट- अहमदाबाद की ताजा बिजनेस इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशन सर्वे (बीआईईएस) रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कंपनियों की बिक्री और मुनाफे की स्थिति मद्धम बनी हुई है। सर्वे में शामिल 56 फीसदी कंपनियों ने बताया कि बीते सितंबर में उनकी बिक्री सामान्य से काफी कम अथवा कुछ कम रही। अगस्त में ऐसा कहने वाली कंपनियों की संख्या 52 प्रतिशत थी। इसी तरह आगे बिक्री सामान्य या सामान्य से अधिक होने की आशा रखने वाली कंपनियों की संख्या में अगस्त की तुलना में तीन प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

यह स्थिति तब है, जब कंपनियों पर लागत में वृद्धि का दबाव नहीं बढ़ रहा है। जाहिर है, कंपनियों की बिक्री इसलिए नहीं बढ़ रही है, क्योंकि उपभोक्ताओं की क्रय-शक्ति घटती चली गई है। इस ट्रेंड की पुष्टि एक बिजनेस अखबार की एक रिपोर्ट से भी होती है, जिसमें बताया गया है कि पिछली दो तिमाहियों में कॉरपोरेट सेक्टर के मुनाफे में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बिक्री से होने वाली उन कंपनियों की आय घट गई है। स्पष्टत: यह मुनाफा शेयर बाजार से हुआ है। यानी अब शेयर बाजार का एक अलग गतिशास्त्र बन गया है, जिसका परंपरागत अर्थ में जिसे अर्थव्यवस्था समझा जाता है, उससे संबंध बेहद कमजोर हो चुका है।

तो बात घूम-फिर कर सरकारी दावों पर आ जाती है, जिनमें देश की माली हालत की खुशनुमा तस्वीर पेश करने के रोज नए तर्क ढूंढे जाते हैँ। जबकि यह रोज अधिक स्पष्ट होता जा रहा है कि असल अर्थव्यवस्था उन दावों की विपरीत दिशा में जा रही है।

RELATED ARTICLES

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

विकास के दावों के बीच भूख की त्रासदी झेलने के लिए लोग मजबूर

 विश्‍वनाथ झा यह अपने आप में एक बड़ा विरोधाभास है कि जिस दौर में दुनिया भर में अर्थव्यवस्था के चमकते आंकड़ों के जरिए लगातार विकास...

 बोतलबंद पानी नहीं, जहर पी रहे हैं हम  

ज्ञानेन्द्र रावत आधुनिक जीवनशैली के तहत हम सभी अपने जीवन को सुखमय बनाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास कर रहे हैं। वह चाहे भौतिक सुख...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

सैलरी खत्म होने से पहले खत्म हो जाता है पैसा? अपनाइए सैलरी मैनेजमेंट का यह आसान मनी प्लानिंग फॉर्मूला,

देहरादून। अच्छी सैलरी होने के बावजूद यदि हर महीने हाथ तंग रहता है, तो समस्या कमाई की नहीं, पैसे की प्लानिंग की हो सकती...

देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता मदरसों पर शिकंजा, उत्तराखंड में अब तक 20 का संचालन बंद

देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों की जांच के बाद प्रशासन की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में एक मदरसा...

डीएम हुए सख्तः देहरादून में नदियों में कूड़ा फेंकने वालों पर होगी FIR, अवैध डंपिंग साइटों पर भी कार्रवाई

देहरादून। नदियों और नदी किनारों पर कूड़ा डालने वालों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शहरी निकायों को...

यूकॉस्ट में शिक्षक दिवस पर व्य़ाख्यानः हिमालयी आपदाओं से निपटने में शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका अहम- प्रो. दुर्गेश पंत

देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आपदा संबंधी चुनौतियों के बीच जल स्रोतों के संरक्षण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता...

Recent Comments