Wednesday, April 29, 2026
Home आर्टिकल फिर एक ट्रेन हादसा

फिर एक ट्रेन हादसा

प्रश्न है कि इस तरह की जानलेवा “मानवीय भूल” बार-बार क्यों हो रही है? यह यह कहानी इस असल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए फैलाई जाती है कि भारतीय रेल एक ढहते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर की मिसाल बनकर रह गई है? इस प्रश्न पर गंभीर विचार-विमर्श की जरूरत है कि हर कुछ अंतराल पर देश में भीषण ट्रेन हादसे क्यों हो रहे हैं। इस बार ऐसी दुर्घटना आंध्र प्रदेश में हुई है। फिर एक खड़ी पैसेंजर ट्रेन को पीछे आकर एक दूसरी पैसेंजर ट्रेन ने टक्कर मार दी। ऐसी घटनाओं के तुरंत बाद अक्सर मीडिया में मानवीय भूल की कहानी प्रचारित कर दी जाती है। मगर प्रश्न है कि इस तरह की जानलेवा “मानवीय भूल” बार-बार क्यों हो रही है?

यह यह कहानी इस असल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए फैलाई जाती है कि भारतीय रेल एक ढहते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर की मिसाल बनकर रह गई है? दशकों से भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की जरूरत बताई जाती रही है। इसके लिए समितियां और आयोग बने। लेकिन उनकी सिफारिशें मंत्रालय की अलमारियों में धूल फांकती रही हैँ। इस बीच देश के कर्ता-धर्ताओं ने अपनी प्राथमिकताएं बदल लीं। आज प्राथमिकता यह नजर आती है कि आर्थिक रूप से सक्षम यात्रियों के लिए कुछ सुविधाजनक ट्रेनें चला दी जाएं और बाकी सब जैसा है, उसी हाल में चलने दिया जाए। चूंकि व्यापारीकरण का नजरिया राजकाज पर हावी है, इसलिए आम नागरिक की जान या सुविधाएं स्वत: प्राथमिकता में नीचे चली जाती हैँ।

इस वर्ष आई सीएजी की एक रिपोर्ट में बताया गया कि 2021-22 में सभी श्रेणियों की यात्री सेवाओं को मिलाकर रेलवे को हुई आय में 68,269 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि माल ढुलाई से लगभग इतनी रकम का ही मुनाफा भी हुआ। अब चूंकि नजरिया हर सेक्टर से हुए हानि-लाभ पर टिका है, तो जाहिर है, आम यात्री सेवाओं को उपेक्षायोग्य समझा जाने लगा है। बहरहाल, प्रश्न है कि क्या यह सोचने का सही नजरिया है? किसी संभावनापूर्ण समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सस्ते परिवहन को ऐसी जरूरी सेवाएं समझा जाता है, जिन्हें उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व माना जाता है।

यह अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी अनिवार्य समझा जाता है। वैसे भी समाज या अर्थव्यवस्था का मकसद इनसान को बेहतर जिंदगी मुहैया कराना ही है। बार-बार हो रही रेल दुर्घटनाएं संभवत: इस बात का संकेत हैं कि भारत इस मकसद से भटकता चला जा रहा है।

RELATED ARTICLES

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की न हो कमी, सीएम धामी ने की मांग

नई दिल्ली। नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने चारधाम...

विपक्ष ने आधी आबादी को हक दिलाने के प्रयास को विफल कर देश के साथ किया महापापः सीएम धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने हजारों...

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच श्रद्धालुओं के लिए खुले बदरीनाथ धाम के कपाट, चारधाम यात्रा के पकड़ी रफ्तार

बदरीनाथ। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक पूजा-विधि के साथ श्रद्धालुओं के...

हर-हर महादेव के जयकारों के बीच खुले केदारनाथ धाम के कपाट, प्रधानमंत्री मोदी के नाम से हुई पहली पूजा

रुद्रप्रयाग/देहरादून। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आज प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सुबह लगभग 8 बजे...

Recent Comments