Sunday, September 6, 2026
Home धर्म-संस्कृति शीतकाल के लिए बंद हुए बदरीनाथ धाम के कपाट, वैदिक मंत्रोच्चारण के...

शीतकाल के लिए बंद हुए बदरीनाथ धाम के कपाट, वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से बंद हुए कपाट

बदरीनाथ (चमोली)/देहरादून। उत्तराखंड के पवित्र बदरीनाथ धाम में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। मंगलवार दोपहर 2:56 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी हुई, हजारों श्रद्धालु इस पल के साक्षी बने। अब कपाट खुलने तक भगवान बदरी विशाल शीतकालीन गद्दी स्थल में विराजेंगे और वहीं उनकी पूजा-अर्चना होगी।

चार दिन से चल रही थी कपाट करने की पूजा

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया चार दिन पहले शुरू हो गई थी। 21 नवंबर से ही मंदिर में बंदी-समारोह की पूजा व आरंभिक रस्में शुरू हो गई थीं। पहले दिन भगवान गणेश की पूजा की गई, इसके बाद अगले दिनों क्रमशः आदि केदारेश्वर और शंकराचार्य मंदिरों के कपाट बंद किए गए, फिर शास्त्र-पूजा और वेद पाठ हुआ और 24 नवंबर को माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया गया।

अनुष्ठानों की समाप्ति पर आज मंदिर का मुख्य द्वार बंद किया गया। बंदी के बाद, भगवान बद्री विशाल (विष्णु) की मूर्तियों और प्रतीकों को शीतकालीन आवासों की ओर ले जाया जाएगा। उनकी मूर्तियाँ और गद्दी पांडुकेश्वर (Pandukeshwar) स्थित योग ध्यान बदरी मंदिर को समर्पित की जाएंगी, जबकि शंकराचार्य की सीट और अन्य पवित्र प्रतीक ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) स्थित नरसिंह मंदिर में स्थानांतरित होंगे।

शीतकाल में कपाट बंद करने की परंपरा

शीतकाल में हिमालयी पर्यावरण और मौसम की कठिनाइयों को देखते हुए वर्षों से कपाट बंद करने की प्रक्रिया चल रही है। भारी हिमपात और ठंड के चलते चारधाम मंदिरों के कपाट बंद करना ज़रूरी होता है ताकि संरचना सुरक्षित रहे और पूजा-अर्चना को भी जारी रखा जा सके। इस दौरान श्रद्धालु शीतकालीन गद्दी स्थलों पर चारधाम दर्शन कर सकते हैं। इसको लेकर सरकार शीतकालीन चार धाम यात्रा को भी प्रोत्साहित कर रही है।

विजयादशमी पर पंचांग और ज्योतिष गणनाओं के बाद उत्तराखंड सरकार और मंदिर समिति (Shri Badri-Kedar Temple Committee, BKTC) कपाट बंद करने की तिथि तय करती है। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए कपाट बंद किए जाते हैं।

बंद हो चुके उत्तराखंड चार धाम के कपाट

  • केदारनाथ धाम
    केदारनाथ मंदिर के कपाट 23 अक्टूबर 2025 को बंद हो चुके हैं। बंद होने के बाद, बाबा केदार की मूर्ति को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में ले जाया गया है, जहां अगले छह माह तक पूजा होगी। यह बाबा केदार का शीतकालीन प्रवास व पूजा स्थल है।

  • गंगोत्री धाम
    गंगोत्री मंदिर के कपाट 22 अक्टूबर 2025 को बंद किए गए थे। उसके बाद से मां गंगा की मूर्ति को मुखबा गांव ले जाया गया है, जहां उनकी पूजा जारी रहती है।

  • यमुनोत्री धाम
    यमुनोत्री धाम के कपाट भी 23 अक्टूबर 2025 को श्रद्धालुओं के लिए बंद हो चुके हैं। बंदी के बाद, माता यमुना की मूर्ति को खरसाली (या खुशिमठ) गांव में शीतकालीन निवास दिया जाता है।

RELATED ARTICLES

देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता मदरसों पर शिकंजा, उत्तराखंड में अब तक 20 का संचालन बंद

देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों की जांच के बाद प्रशासन की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में एक मदरसा...

डीएम हुए सख्तः देहरादून में नदियों में कूड़ा फेंकने वालों पर होगी FIR, अवैध डंपिंग साइटों पर भी कार्रवाई

देहरादून। नदियों और नदी किनारों पर कूड़ा डालने वालों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शहरी निकायों को...

Dehradun Murder News: मजदूरी के बकाया पैसों पर विवाद, हेल्पर ने की 72 वर्षीय महिला की हत्या; 12 घंटे में गिरफ्तार

देहरादून। रायपुर थाना क्षेत्र में 72 वर्षीय रेखा बंसल की हत्या के मामले में पुलिस ने 12 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

सैलरी खत्म होने से पहले खत्म हो जाता है पैसा? अपनाइए सैलरी मैनेजमेंट का यह आसान मनी प्लानिंग फॉर्मूला,

देहरादून। अच्छी सैलरी होने के बावजूद यदि हर महीने हाथ तंग रहता है, तो समस्या कमाई की नहीं, पैसे की प्लानिंग की हो सकती...

देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता मदरसों पर शिकंजा, उत्तराखंड में अब तक 20 का संचालन बंद

देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों की जांच के बाद प्रशासन की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में एक मदरसा...

डीएम हुए सख्तः देहरादून में नदियों में कूड़ा फेंकने वालों पर होगी FIR, अवैध डंपिंग साइटों पर भी कार्रवाई

देहरादून। नदियों और नदी किनारों पर कूड़ा डालने वालों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शहरी निकायों को...

यूकॉस्ट में शिक्षक दिवस पर व्य़ाख्यानः हिमालयी आपदाओं से निपटने में शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका अहम- प्रो. दुर्गेश पंत

देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आपदा संबंधी चुनौतियों के बीच जल स्रोतों के संरक्षण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता...

Recent Comments