Sunday, September 6, 2026
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पद्म भूषण राम बहादुर राय को “लेखक गांव सृजन सम्मान”, हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर हुआ कार्यक्रम

देहरादून। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लेखक गांव के नालंदा पुस्तकालय परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार एवं विचारक पद्म भूषण राम बहादुर राय रहे। इस अवसर पर उन्हें “लेखक गांव सृजन सम्मान” से सम्मानित किया गया।

पत्रकारिता जीवन और मीडिया की चुनौतियां

दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए राम बहादुर राय ने अपने लंबे पत्रकारिता अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने उन्हें कई नए आयाम दिए। आज हिंदी को अनेक देशों में पढ़ाया जा रहा है और इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य, प्रतिस्पर्धा और व्यवसायिकता पर चिंता जताई और कहा कि सरकार को ‘मीडिया काउंसिल’ के गठन पर विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने लेखक गांव की स्थापना की सराहना करते हुए कहा कि यह स्वाधीन भारत का अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र बनेगा।

प्रतिष्ठित मंच से उठे अहम विचार

  • डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (लेखक गांव के संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री): हिंदी पत्रकारिता राष्ट्र की चेतना, सांस्कृतिक धरोहरों और राष्ट्रीय आंदोलनों की संवाहक रही है। स्वाधीनता से पहले और बाद में इसके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

  • प्रो. श्री प्रकाश सिंह (कुलपति, हे.न.ब. गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय): कागज और कलम में अपार शक्ति है। शोधार्थियों को अपने आलेख तथ्यों और आंकड़ों पर आधारित लिखने चाहिए।

  • जय सिंह रावत (वरिष्ठ पत्रकार, मुख्य वक्ता): मानव सभ्यता की यात्रा पाषाण काल से मंगल ग्रह तक पहुंची है, इसमें मीडिया की निर्णायक भूमिका रही है।

  • योगेश भट्ट (राज्य सूचना आयुक्त): हिंदी पत्रकारिता के बिना राष्ट्र की कल्पना संभव नहीं है। लेखक गांव से जलाई गई यह ज्योत निरंतर जलती रहनी चाहिए।

विद्वानों और सम्मानित अतिथियों की मौजूदगी

इस मौके पर डॉ. डी.आर. पुरोहित, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. सविता मोहन सहित अनेक विद्वानों ने विचार रखे।
लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने स्वागत भाषण में संस्थान के विजन और मिशन को विस्तार से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुशील उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, पद्मश्री डॉ. माधुरी बर्थवाल, पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा, अविकल थपलियाल, राकेश डोभाल, अरुण शर्मा, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के कुलपति जी.एस. रज्वार, प्रो-वीसी आर.के. सुन्दिरयाल, कई वरिष्ठ पत्रकार, विद्वान और शोध छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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