देहरादून। पिछले कुछ समय में देशभर में साइबर ठगी के मामलों में जबरदस्त तेजी आई है। अपना उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। पिछले करीब एक साल के दौरान प्रदेश के 26 हजार से ज्यादा लोग साइबर ठगों के शिकार बने हैं। लोगों ने करीब 167 करोड़ रुपये की रकम साइबर ठगों के हाथों गंवाई है। इसमें पढ़े-लिखे लोगों की संख्या काफी ज्यादा है, जो ज्यादा चिंता का विषय है। सिर्फ फाइनेंसियल और साइबर अवेयरनेस के माध्यम से ही इससे बचाव किया जा सकता है। इसी को देखते हुए बजाज फाइनेंस ने मंगलवार को राजधानी देहरादून में डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
प्रेस क्लब में आयोजित कार्यशाला में लोगों को अलग-अलग तरह की साइबर धोखाधड़ी और धोखेबाजों से अपने फाइनेंस को सुरक्षित रखने के तरीकों के संबंध में जागरूक किया गया। कंपनी की ओर से देशभर के 100 शहरों में सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारत में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) बजाज फाइनेंस लिमिटेड ने साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ ‘नॉकआउट डिजिटल फ्रॉड’ नामक एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें भिन्न-भिन्न तरह के जोखिमों और फाइनेंस को सुरक्षित रखने के सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीकों पर डिजिटल लेनदेन करने वाले लोगों को जागरूक किया गया।
नॉकआउट डिजिटल फ्रॉड’ कार्यक्रम भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2024 में एनबीएफसी के लिए जारी की गईं उन धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन दिशा-निर्देशों के अनुरूप है, जिनमें डिजिटल ईकोसिस्टम को सभी के लिए सुरक्षित बनाने के लिए जल्द पहचान, कर्मचारियों के दायित्व और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों का ध्यान आम वित्तीय धोखाधड़ी की ओर आकर्षित करना है, जिसमें फाइनेंस कंपनियों की ही तरह दिखने वाले फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सएप ग्रुप और वेबसाइट बनाकर झूठे दावा करते हैं और उनके कर्मचारी होने का दावा करते हैं।
देहरादून में साइबर क्राइम विभाग के पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी एसपी) अंकुश मिश्रा ने उत्तराखंड में साइबर धोखाधड़ी में आई तेजी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में उत्तराखंड में साइबर धोखाधड़ी के 26 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों को 167 करोड़ रुपये से ज्यादा का वित्तीय नुकसान हुआ है। रोजाना इस तरह के मामलों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने जन-जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “साइबर धोखाधड़ी के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाली कोई भी पहल न केवल स्वागत योग्य है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा में मदद करने के लिए जरूरी भी है।”
उन्होंने कहा कि सभी लोगों को राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा धोखाधड़ी की स्थिति में आप तत्काल सहायता के लिए 100 या 112 भी डायल कर सकते हैं। उन्होंने विभिन्न प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी जैसे यूपीआई घोटाले, कार्ड धोखाधड़ी, ओटीपी-आधारित धोखाधड़ी आदि के बारे में लोगों को शिक्षित करते हुए व्यावहारिक सुझाव और वास्तविक जीवन के उदाहरण साझा किए। उन्होंने पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) को रोकने के लिए आधार बायोमेट्रिक्स को सुरक्षित रखने के महत्व पर भी जोर दिया।
देहरादून के पूर्व डीएसपी बृजभूषण जुयाल ने नागरिकों को सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहने की सलाह दी। उन्होंने सावधान करते हुए कहा, “धोखेबाज अक्सर कम जागरूकता का फायदा उठाते हैं, और लोगों को बेतहाशा लाभ के झूठे वादे करके लुभाते हैं। मैं नागरिकों से सतर्क रहने, संदिग्ध गतिविधि की सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन को देने और ऑनलाइन अनजान प्रोफाइल से संपर्क करने से बचने का आग्रह करता हूं।
इस अवसर पर बजाज फाइनेंस के प्रवक्ता ने कहा, “हमारे उपभोक्ताओं की वित्तीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित लगातार ऑनलाइन और ऑफलाइन सलाह जारी कर रहे हैं, साथ ही नागरिकों के साथ इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर जमीनी स्तर पर भी बातचीत के जरिए, सभी को साइबर सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।”
‘नॉकआउट डिजिटल फ्रॉड’ कार्यक्रम साइबर समुदाय को व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए बहुमूल्य सुझाव प्रदान कर रहे हैं, जिसमें ओटीपी-पिन साझा करने, संदिग्ध ईमेल, एसएमएस, लिंक, क्यूआर कोड पर क्लिक करने और अज्ञात स्रोतों से एप्लिकेशन डाउनलोड करने से बचना शामिल है। इसमें प्रमुख शहरों और कस्बों में परस्पर संवादात्मक (इंटरैक्टिव) कार्यशालाओं, डिजिटल जागरूकता अभियानों और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों की एक श्रृंखला शामिल है।






