Wednesday, August 12, 2026
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ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’, सीएम धामी बोले- उत्तराखंड की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने पर फोकस

देहरादून। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, भाषा और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति केवल विरासत नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा और पहचान है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार लगातार योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रही है।

सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में मुख्यमंत्री धामी ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया।

कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि ताई तुगुंग ने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगमंच और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक मंच प्रदान किया है।

बलूनी ग्रुप ऑफ एजुकेशन के चेयरमैन डा. नवीन बलूनी ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी का कृतित्व उत्तराखंड की अनमोल धरोहर है। उन्होंने पहाड़ के हर मुद्दे को अपने गीतों से जीवंत किया है। एमडी विपिन बलूनी ने कहा कि राज्य की लोक संस्कृति और अस्मिता को बचाने और बढ़ाने में उनके गीतों का बेहद अहम योगदान है।

नेगी के गीतों में दिखता है उत्तराखंड का जनजीवन

मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह नेगी को उत्तराखंड की लोक संस्कृति का पुरोधा बताते हुए कहा कि उनके गीतों में पहाड़ का जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाएं और सामाजिक सरोकार जीवंत रूप में दिखाई देते हैं। उनके गीतों और संगीत ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है।

उन्होंने कहा कि नेगी के गीतों का अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित होना लोकभाषा और लोकसंस्कृति को व्यापक दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” के माध्यम से नई पीढ़ी और देश-दुनिया के पाठक उत्तराखंड की लोक संस्कृति और नरेंद्र सिंह नेगी की दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित हो सकेंगे।

275 सांस्कृतिक दल और 226 कलाकार सूचीबद्ध

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोक कलाकारों को मंच और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सूचीबद्धकरण की प्रक्रिया को सरल बना रही है। अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और उनसे जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निशुल्क वाद्ययंत्र और वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके साथ ही लोककला और साहित्य के क्षेत्र में जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये कर दी गई है। वर्तमान में 180 कलाकार इसका लाभ ले रहे हैं।

गुरु-शिष्य परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए केवल संरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को उससे जोड़ना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से लोक कलाकारों के माध्यम से छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इनके जरिए युवाओं को पारंपरिक लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़ और छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण आधार हैं। खुशी की बात है कि प्रदेश के युवा आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत कर रहे हैं।

साहित्य के क्षेत्र में भी कई योजनाएं चल रहीं सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ शुरू किया गया है, जिसके तहत 5 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के माध्यम से अब तक हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के 57 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है।

इसके अलावा ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की शुरुआत की गई है, जिसकी सम्मान राशि 5 लाख 51 हजार रुपये निर्धारित है। वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी दिया जा चुका है।

प्रदेश में विकसित किए जाएंगे ‘साहित्य ग्राम’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को केवल पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी स्थापित करना चाहती है। इसी दिशा में प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

इन साहित्य ग्रामों में साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें भी इसी व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार लोकभाषाओं, लोककलाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए आगे बढ़ रही है और समाज, कलाकारों तथा साहित्यकारों के सहयोग से प्रदेश की लोक संस्कृति को और मजबूत किया जाएगा।

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