Monday, March 9, 2026
Home आर्टिकल लोकतंत्र के लिए अहम

लोकतंत्र के लिए अहम

इलेक्ट्रॉल बॉन्ड योजना शुरू से विवादास्पद थी। जो अनुभव रहा, उससे इसके खिलाफ आरंभ ही कही गई बातें लगातार ठोस साबित होती गईं। इनके बीच यह तर्क महत्त्वपूर्ण था कि असीमित और गुप्त राजनीतिक चंदा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के तकाजे के खिलाफ है।
इलेक्ट्रॉल बॉन्ड योजना को रद्द कर सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा योगदान किया है। यह योजना शुरू से विवादास्पद थी। जो अनुभव रहा, उससे इसके खिलाफ आरंभ ही कही गई बातें लगातार ठोस साबित होती गईं। इनके बीच दो तर्क महत्त्वपूर्ण थे- पहला यह कि असीमित और गुप्त राजनीतिक चंदा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के तकाजे के खिलाफ है।

दूसरी दलील यह थी कि इलेक्ट्रॉल बॉन्ड योजना में शामिल प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत मिले सूचना के अधिकार का उल्लंघन हैं। इन दोनों ही तर्कों को अब सुप्रीम कोर्ट ने वाजिब ठहराया है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि गुप्त चंदे का प्रावधान सूचना के अधिकार के खिलाफ है। इस प्रावधान के तहत एक और आपत्तिजनक बात यह रही है कि चंदा देने वाली कंपनियों की पहचान आम जन से तो छिपी रहती है, लेकिन सरकार को यह सब मालूम रहता है कि कौन किसको कितना चंदा दे रहा है। इससे इस आरोप को बल मिला कि कंपनियों के लिए विपक्षी दलों को चंदा देना जोखिम भरा हो गया है।

तमाम उपलब्ध आंकड़ों से इस बात की लगातार पुष्टि हुई है कि इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स के तहत दिए गए चंदे का अधिकांश हिस्सा सत्ताधारी दल को गया है। कोर्ट ने उचित ही यह कहा कि राजनीति चंदे के जरिए दाताओं की सत्ता के हलकों तक पहुंच बनती है। इस पहुंच से नीति निर्माण के प्रभावित होने का अंदेशा पैदा हो जाता है। सार्वजनिक दायरे में ये धारणा भी गहराई है कि वर्तमान सरकार और कुछ कॉरपोरेट घरानों के बीच ऐसे अंत:संबंध बन गए हैं, जिनसे देश की महत्त्वपूर्ण नीतियां प्रभावित हो रही हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का इस योजना को संचालित करने वाले भारतीय स्टेट बैंक को दिया गया यह आदेश अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि वह इस योजना के तहत पार्टियों को मिले चंदे की पूरी जानकारी निर्वाचन आयोग को दे। आयोग को उसे अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा। इस तरह अब उम्मीद है कि इस योजना का पूरा सच सामने आ जाएगा।

RELATED ARTICLES

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना...

धराली से थराली तक: आपदा और उम्मीद के बीच पहाड़, हिमालय की गोद में बसे हमारे गांव कितने सुरक्षित

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड की धरती एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। कभी गढ़वाल के उत्तरकाशी में धराली गाँव तो कभी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

UTTARAKHAND BUDGET: 1.11 लाख करोड़ का बजट पेश, गरीब-युवा-किसान और महिलाओं पर फोकस

गैरसैंण/देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया।...

अर्थव्यवस्था में उत्तराखंड की ऊंची छलांग, जीडीपी डेढ़ गुना बढ़ी, प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी

देहरादून। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तेजी का दौर जारी है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹3,81,889 करोड़ पहुंच गया है,...

उत्तरांचल प्रेस क्लब में रंगारंग होली मिलन महोत्सव की धूम, रंगों की फुहार और लोक संगीत की गूंज में सरोबार हुए लोग

देहरादून। देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब का होली मिलन समारोह इस बार खास उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित हुआ। रंगों की फुहार, लोक...

दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, केजरीवाल और सिसोदिया बाइज्जत बरी

नई दिल्ली। दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री...

Recent Comments