ऋषिकेश/देहरादून। चारधाम यात्रा 2026 को लेकर उत्तराखंड में तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही हैं। शुक्रवार को प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर कई अहम फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर आने वाली यात्रा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर परिसरों की मर्यादा पर पड़ेगा। सरकार और प्रशासन का फोकस इस बार यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और अनुशासित बनाने पर है।
आज ऋषिकेश में गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक हुई। बैठक में सड़क, स्वास्थ्य, ट्रैफिक, पार्किंग, ठहराव और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए। गढ़वाल आयुक्त ने साफ कहा कि यात्रा मार्गों की स्थिति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और चारधाम मार्गों की मरम्मत, चौड़ीकरण और गड्ढामुक्त सड़कें सुनिश्चित करने के लिए 15 मार्च तक की समयसीमा तय की गई है। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि तय समय के भीतर कार्य पूरा कर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
चारधाम यात्रा से जुड़ा आज का सबसे बड़ा फैसला मंदिर परिसरों की पवित्रता और अनुशासन से जुड़ा रहा। सरकार ने आगामी यात्रा सत्र से बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरा ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। प्रशासन का मानना है कि इससे मंदिरों में अव्यवस्था, अनावश्यक भीड़ और वीडियो-फोटोग्राफी के कारण होने वाली परेशानी पर अंकुश लगेगा। साथ ही श्रद्धालु दर्शन के दौरान अधिक एकाग्रता और शांति का अनुभव कर सकेंगे। इसके लिए मंदिरों के बाहर मोबाइल और कैमरा सुरक्षित रखने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसी बीच शीतकालीन यात्रा से जुड़ा आंकड़ा भी सामने आया है। प्रशासन के अनुसार इस समय शीतकालीन यात्रा के तहत 27 हजार से अधिक श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहुंच चुके हैं। ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में सबसे अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि चारधाम से जुड़ी धार्मिक गतिविधियां वर्षभर श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं, और प्रशासन को हर मौसम में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखनी होंगी।
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यात्रा के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, एंबुलेंस सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया जाए, ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके साथ ही ट्रैफिक प्रबंधन और पार्किंग स्थलों के बेहतर संचालन पर भी जोर दिया गया।
कुल मिलाकर आज के फैसलों से यह संकेत साफ है कि सरकार इस बार चारधाम यात्रा को लेकर पहले से कहीं अधिक सख्त, व्यवस्थित और दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है। सड़क सुधार से लेकर मंदिर परिसरों में अनुशासन और श्रद्धालुओं की सुविधा तक, हर स्तर पर ठोस तैयारी की दिशा में कदम बढ़ाए जा चुके हैं। आने वाले हफ्तों में इन फैसलों का जमीनी असर दिखने की उम्मीद है।






