नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। दो दिवसीय सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के साथ स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने, सुरक्षित सप्लाई चेन तैयार करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग और स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने के लिए साझा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। भारत ने इस बार BRICS को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अधिक प्रभावी और संकटों से निपटने में सक्षम मंच बनाने पर जोर दिया है।
आतंकवाद पर सख्त संदेश
सम्मेलन में भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा करते हुए इसके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की जरूरत बताई गई। आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों को भी स्वीकार नहीं करने की बात कही गई।
घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की गई। आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, उन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर सदस्य देशों ने सहमति जताई।
अपनी मुद्रा में व्यापार बढ़ाने की दिशा में कदम
BRICS के आर्थिक एजेंडे में इस बार सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने का मुद्दा प्रमुख रहा। मकसद अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को आसान और कम खर्चीला बनाने के साथ किसी एक विदेशी मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है।
सदस्य देशों के भुगतान तंत्र को आपस में अधिक प्रभावी तरीके से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। इसके अलावा New Development Bank के जरिए स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।
हालांकि इसे BRICS की नई साझा मुद्रा की शुरुआत मानना सही नहीं होगा। फिलहाल सदस्य देश अपनी-अपनी मुद्राओं में व्यापार और भुगतान बढ़ाने के व्यावहारिक विकल्पों पर काम कर रहे हैं।
Critical Minerals पर मोदी का बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दूसरे दिन Critical Minerals और नई तकनीक को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण संसाधनों और तकनीक का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर दबाव बनाने के साधन के रूप में नहीं होना चाहिए।
कोरोना महामारी और हाल के वैश्विक संकटों का जिक्र करते हुए मोदी ने मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि किसी एक हिस्से में पैदा हुई बाधा का असर आज पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
महामारी से पहले मिलेगा खतरे का संकेत
BRICS देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी साझा तैयारी बढ़ाने का फैसला किया है। संक्रामक बीमारियों के संभावित खतरे की समय रहते पहचान के लिए BRICS Integrated Early Warning System को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।
इसके साथ प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी से जुड़े डेटा को सदस्य देशों के बीच बेहतर तरीके से साझा करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य महामारी या बड़ी आपदा की स्थिति में देशों को पहले से तैयार करना है।
AI और डिजिटल तकनीक भी एजेंडे में
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब BRICS के प्रमुख भविष्य के एजेंडे में शामिल हो गया है। सदस्य देशों ने ऐसी AI तकनीक विकसित करने पर जोर दिया है जो सुरक्षित, जिम्मेदार और सभी के लिए सुलभ हो।
भारत ने खास तौर पर विकासशील देशों और Global South को नई तकनीक के लाभ से जोड़ने की जरूरत बताई। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी पहल की गई है।
टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं पर चिंता
वैश्विक व्यापार में बढ़ रहे एकतरफा टैरिफ और दूसरी व्यापारिक पाबंदियों पर भी BRICS देशों ने चिंता जताई। सदस्य देशों ने ऐसी बाधाओं को वैश्विक व्यापार और विकास के लिए चुनौती माना है।
इसके साथ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग भी दोहराई गई।
पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी सम्मेलन में प्रमुखता से उठा। BRICS देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और विवादों का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के जरिए निकालने की अपील की।
अलग-अलग वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के अपने रणनीतिक हित होने के बावजूद संयुक्त घोषणा पर सहमति बनना सम्मेलन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में माना जा रहा है।
मोदी-शी मुलाकात पर दुनिया की नजर
सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत भी चर्चा के केंद्र में रही। करीब सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग के साथ मोदी की बैठक में भारत-चीन संबंधों को स्थिर करने, सीमा क्षेत्रों में शांति और आर्थिक रिश्तों सहित कई विषयों पर बातचीत हुई।
दोनों देशों ने मतभेदों को विवाद का रूप न लेने देने की जरूरत पर जोर दिया। भारत की ओर से सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
मोदी-पुतिन ने भी की द्विपक्षीय वार्ता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की बैठक में दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों की समीक्षा हुई। ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई।
मोदी ने वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की भारत की नीति दोहराई। पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अगले भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण भी दिया।
BRICS का दायरा अब अर्थव्यवस्था से कहीं आगे
नई दिल्ली सम्मेलन से यह भी साफ हुआ कि BRICS अब केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग तक सीमित मंच नहीं रह गया है। आतंकवाद, वैश्विक सुरक्षा, Critical Minerals, AI, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे इसके एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान BRICS को Global South की मजबूत आवाज के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की है। आने वाले समय में स्थानीय मुद्रा में व्यापार और नए भुगतान तंत्र जैसे प्रस्ताव जमीन पर कितनी तेजी से उतरते हैं, इस पर दुनिया की नजर रहेगी।






