नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारत ने ब्रिक्स के मंच से आर्थिक सहयोग का नया खाका सामने रखा है। नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 में सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन को प्रोत्साहित करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी मजबूत करने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी बिना किसी दोहरे मापदंड के मिलकर मुकाबला करने की जरूरत बताई। यह खबर अखबार के पेज 5 पर प्रकाशित ब्रिक्स कवरेज के तथ्यों के आधार पर नए सिरे से लिखी गई है।
व्यापार में स्थानीय मुद्राओं की भूमिका बढ़ाने पर मंथन
ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। सदस्य देशों के आपसी कारोबार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। ऐसा होने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में ब्रिक्स देश आगे बढ़ सकते हैं।
इसके साथ ही व्यापार और निवेश के लिए सदस्य देशों के बीच ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, जिससे आपसी आर्थिक गतिविधियों को और आसान बनाया जा सके।
आतंकवाद पर दोहरा रवैया स्वीकार नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आतंकवाद से निपटने के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाने के बजाय एक समान और स्पष्ट नीति की जरूरत बताई।
भारत का जोर इस बात पर रहा कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है और इसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
BRICS को टकराव नहीं, सहयोग का मंच बनाने पर जोर
ब्रिक्स की बढ़ती ताकत के बीच भारत ने इसे किसी दूसरे देश या समूह के विरोध में खड़ा संगठन मानने के बजाय सहयोग के मंच के रूप में आगे बढ़ाने की बात रखी।
सदस्य देशों के बीच आर्थिक भागीदारी के साथ तकनीक, इनोवेशन और विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। ब्रिक्स के विस्तार के बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था और आबादी के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व इस समूह के पास आ गया है।
ग्लोबल साउथ को मजबूत आवाज देने की कोशिश
भारत ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत को भी सम्मेलन के एजेंडे से जोड़ा। मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
ब्रिक्स के जरिए भारत ग्लोबल साउथ से जुड़े देशों की प्राथमिकताओं को वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रभावी ढंग से सामने लाने पर जोर दे रहा है।
भविष्य के BRICS के लिए तीन प्रमुख आधार
सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सहयोग के भविष्य को लेकर Resilience, Innovation और Cooperation जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया। बदलती आर्थिक और तकनीकी परिस्थितियों में सदस्य देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने को संगठन की आगे की यात्रा के लिए अहम माना गया।
सम्मेलन में आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों के साथ सदस्य देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। भारत का प्रयास ब्रिक्स को ऐसा मंच बनाने का है, जहां विकास, तकनीक और आर्थिक सहयोग के साथ वैश्विक चुनौतियों पर भी साझा रास्ता तलाशा जा सके।






