अनिल चन्दोला
देहरादून। उत्तराखंड सरकार के पिछले कई वर्षों से प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड स्टेट ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (यूएसओसीए) ने 90 हजार से ज्यादा किसानों के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट को सस्पेंड कर दिया है। भारत सरकार के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को पत्र लिखा है। साथ ही, किसानों को सर्टिफिकेशन के लिए अतिरिक्त समय देने पर भी सहमति जताई है। दूसरी ओर, चार माह से वेतन न मिलने से नाराज कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके कारण किसानों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया समय पर पूरी हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है।
प्रदेश में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के स्तर से पिछले कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को ऑर्गेनिक खेती से जोड़ने, उनके उत्पादों के प्रमाणीकरण और उन्हें बाजार तक पहुंचाने के लिए भी तमाम प्रयास हुए हैं। इसके लिए राज्य जैविक उत्पाद परिषद और उत्तराखंड स्टेट ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी भी बनाई गई। पिछले करीब 20 वर्षों में बड़ी संख्या में किसान जैविक खेती की इस पहल से जुड़े भी।
वर्तमान में करीब डेढ़ लाख पंजीकृत किसान हैं, जो 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में जैविक खेती कर रहे हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम की सुस्ती और अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली के कारण, वर्षों की यह मेहनत बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। आलम यह है कि 312 ऑर्गेनिक ग्रोवर ग्रुप से जुड़े 90 हजार से ज्यादा किसानों के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सस्पेंड हो चुके हैं। अगर यही हालात रहे तो जून अंत तक प्रदेशभर में एक लाख 13 हजार से ज्यादा किसानों का सर्टिफिकेशन सस्पेंड हो जाएगा।
कानूनी इकाई का दर्जा न होने पर हुई कार्रवाई
किसान समूहों के पास वैध कानूनी इकाई का दर्जा न होने के कारण यह कार्रवाई की गई। दरअसल, सरकारी नियमों के अनुसार, समूहों के पास कानूनी इकाई (Legal Entity) का दर्जा होना अनिवार्य है। लेकिन उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद से जुड़े यह समूह सोसाइटी या कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड नहीं थे। एपीडा ने इसके लिए 16 अप्रैल 2026 को भी सचिव कृषि एसएन पांडेय को पत्र लिखा था। हालांकि उसके बावजूद विभागीय स्तर पर किसानों को रजिस्टर्ड करने की कोई पहल नहीं हुई।
एपीडा ने जताई चिंता, अतिरिक्त समय देने को तैयार
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन अपीडा के उत्तराखंड जैविक खेती के लिहाज से देशभर के राज्यों में काफी बेहतर स्थिति में है। ऐसे में प्राधिकरण ने भी बड़ी संख्या में किसानों का प्रमाणीकरण निलंबन होने पर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य सरकार से यूओसीबी और यूएसओसीए को निर्देशित करने का अनुरोध भी किया है ताकि किसानों का प्रमाणीकरण रिन्यूवल हो सके और वो ऑर्गेनिक खेती से जुड़े रहें। उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त समय देने पर भी सहमति व्यक्त की है।
कर्मचारियों को चार माह से नहीं मिला वेतन
उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद से जुड़े कर्मचारियों को चार माह से वेतन नहीं मिला है। इसके कारण परिषद के फील्ड और ऑफिस के सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि अधिकारियों के सुस्त रवैये और प्रोजेक्ट की जानकारी न होने के कारण यह परेशानियां हुई हैं। परिषद के कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष प्रवेंद्र रावत, महासचिव गुरुदेव राणा के अनुसार, कर्मचारियों को चार माह से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में उनके सामने दो जून की रोटी का संकट पैदा हो गया है। अधिकारी प्रोजेक्ट को चलाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, जिससे किसानों और कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिषद कार्यालय पर धरना देने वालों में सूरज पाल, डा. देवेंद्र नेगी, यशवंत बिष्ट, प्रज्ञा सिंह, संदीप नेगी, सुभाष सक्टा समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
कर्मचारी दोषी, प्रमाणीकरण नहीं करेंगे तो वेतन भी नहींः एमडी
यूओसीबी के एमडी अभय सक्सेना इस पूरे प्रकरण के लिए परिषद कर्मचारियों को दोषी ठहरा रहे हैं। उनके अनुसार, किसान समूहों को सस्टेनेबल बनाने और कानूनी इकाई का दर्जा दिलाने की जिम्मेदारी कर्मचारियों की थी। भारत सरकार ने पहले भी कहा था कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए था। जिस समय रजिस्ट्रेशन सस्पेंड रहा है, एपीडा उस समय को भी कन्टीन्यूएशन में जोड़ने पर सहमत हो गया है। कर्मचारियों को प्रमाणीकरण के अनुपात में ही मानदेय दिया जाता है। अगर कर्मचारी प्रमाणीकरण नहीं करेंगे तो उन्हें मानदेय भी नहीं दिया जाएगा। 90 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। अगले 10-12 दिन में यह हमें मिल जाएगा, जिससे मानदेय दिया जाएगा।






