Friday, June 26, 2026
Home आर्टिकल कोरोना प्रबंधन के बारे में क्या पढ़ाया जाएगा?

कोरोना प्रबंधन के बारे में क्या पढ़ाया जाएगा?

एक बहुत दिलचस्प खबर आई है कि अब स्कूलों में बच्चों को चंद्रयान-तीन की सफल लैंडिंग, जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन और कोरोना प्रबंधन के बारे में पढ़ाया जाएगा। इन तीनों को सिलेबस में शामिल करने का फैसला इसलिए किया गया है ताकि बच्चों को आधुनिक समय के घटनाक्रम के बारे में जानकारी रहे। निश्चित रूप से चंद्रयान-तीन की सफल लैंडिंग भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि है और जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन भी भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। इनके बारे में बच्चों को बताया जाना चाहिए। लेकिन सवाल है कि कोरोना के प्रबंधन के मामले में क्या पढ़ाया जाएगा? यह भी सवाल है कि भारत के कोरोना प्रबंधन में पढ़ाए जाने लायक क्या है?

कहीं ऐसा तो नहीं है कि सरकार कोरोना प्रबंधन के नाम पर वैक्सीन की उपलब्धि का बखान करेगी? पिछल दिनों एक फिल्म आई थी ‘द वैक्सीन वॉर’। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फिल्म की तारीफ की थी लेकिन चूंकि फिल्म एक पीआर एक्सरसाइज के तौर पर बनाई गई थी, जिसमें लॉकडाउन, चिलचिलाती गर्मी में लाखों लोगों पलायन, ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों, बेड नहीं मिलने की वजह से अस्पतालों के बाहर तड़प तड़प करते मरते लोगों, गंगा में बहती या गंगा किनारे दफन कर दी गई लाशों के बारे में कुछ नहीं दिखाया गया था इसलिए फिल्म बुरी तरह से पिट गई।

लोग बिल्कुल ही थियेटर में नहीं गए। क्योंकि यह बहुत पहले की कहानी नहीं है। दो साल पहले लोगों ने सब कुछ अपनी आंखों से देखा है इसलिए उस पर परदा डालना मुश्किल है। तभी सवाल है कि क्या स्कूलों में बच्चों को कोरोना की त्रासदी के हर पहलू के बारे में पढ़ाया जाएगा या राजनीतिक भाषणों की तरह यह बताया जाएगा कि भारत ने सबसे शानदार तरीके से कोरोना का प्रबंधन किया।

RELATED ARTICLES

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

विकसित भारत रोजगार योजना से रोजगार पाने और देने वालों को मिल रहा फायदा, 19 जून को राष्ट्रीय कार्यक्रम

देहरादून। देश में रोजगार सृजन को गति देने और युवाओं को औपचारिक क्षेत्र से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विकसित...

11 साल बाद खुला किसाऊ बांध परियोजना का रास्ता, उत्तराखंड-हिमाचल समेत छह राज्यों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली। उत्तर भारत की बहुप्रतीक्षित किसाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। विभिन्न कारणों से...

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

एसडीजी में उत्तराखंड की बड़ी छलांग, देशभर में 10वें से पहले स्थान पर पहुंचा, जिलों में रुद्रप्रयाग अव्वल

देहरादून। उत्तराखंड ने नीति आयोग के एसडीजी (Sustainable Development Goals) इंडिया इंडेक्स में बड़ी छलांग लगाई है। पिछली रैंकिग में 10वें स्थान पर रहा...

Recent Comments