Tuesday, March 10, 2026
Home आर्टिकल सेहत में बड़ा सहारा, पैंसठ वर्ष से अधिक आयु के लोगों को...

सेहत में बड़ा सहारा, पैंसठ वर्ष से अधिक आयु के लोगों को भी स्वास्थ्य बीमा

मनोज भूटानी
गंभीर और ऐसी बीमारियों, जिनके इलाज में भारी रकम खर्च करनी पड़ती है, स्वास्थ्य बीमा लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित होता है। स्वास्थ्य बीमा शुरू करने का मकसद भी यही था कि लोगों को स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च की चिंता से मुक्त रखा जा सके। मगर इसमें एक बड़ी अड़चन थी कि पैंसठ वर्ष से अधिक उम्र के लोग स्वास्थ्य बीमा नहीं खरीद सकते थे। आमतौर पर ज्यादातर लोगों को इसी उम्र के बाद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घेरती हैं।

मगर स्वास्थ्य बीमा न खरीद पाने के चलते वे निराश हो जाते थे। फिर, कैंसर, हृदय रोग या एड्स जैसी कुछ गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा, स्वास्थ्य बीमा खरीदने के बाद अड़तालीस महीने तक उसका लाभ नहीं उठाया जा सकता था। अब भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने इन अड़चनों को दूर करते हुए नियम जारी किया है कि पैंसठ वर्ष से अधिक आयु के लोग भी स्वास्थ्य बीमा खरीद सकेंगे। यानी अब किसी भी उम्र में स्वास्थ्य बीमा खरीदा जा सकता है। बीमा कंपनियां अब कैंसर, एड्स और हृदय रोग जैसी बीमारियों की वजह से किसी को बीमा देने से इनकार नहीं कर सकतीं। बीमा खरीदने के छत्तीस महीने बाद उसका लाभ उठाया जा सकेगा।

बीमा क्षेत्र को विस्तार देने और प्रतिस्पर्धी बनाने के मकसद से इस क्षेत्र में निजी बैंकों और विदेशी कंपनियों के लिए सौ फीसद निवेश का रास्ता खोला गया था। फिर बीमा कंपनी बदलने की भी छूट दे दी गई थी। निस्संदेह इससे बीमा कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी और लोगों को इसका लाभ मिलना भी शुरू हो गया। मगर स्वास्थ्य बीमा के मामले में कई तरह की अड़चनें बनी हुई थीं। उम्र और कुछ गंभीर बीमारियां इस रास्ते में बड़ी बाधा थीं। अब उनके हट जाने से निस्संदेह बहुत सारे लोगों के लिए आसानी हो जाएगी।

अब जिस तरह जलवायु परिवर्तन और बदलती स्थितियों के चलते अनेक प्रकार की नई-नई बीमारियां पैदा हो रही हैं और बहुत सारे लोगों के लिए इलाज कराना मुश्किल होता जा रहा है, उसमें बीमा कंपनियों का वृद्धावस्था की ओर बढ़ती आबादी को इस सुविधा से वंचित रखना उचित नहीं था। दुनिया के अनेक देशों में वृद्धों की सेहत पर विशेष ध्यान दिया जाता है, मगर जिस तरह हमारे देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ और उनमें सुविधाओं का अभाव बढ़ता गया है, उसमें बुजुर्ग आबादी की सेहत का ध्यान रखना चुनौती बनता गया है।

ऐसे में स्वास्थ्य बीमा की शर्तों को लचीला बनाने से कुछ बेहतर नतीजे मिल सकते हैं। मगर अब भी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को पुख्ता, पारदर्शी और प्रभावशाली बनाने की जरूरत रेखांकित की जाती रहती है। केंद्र सरकार ने आयुष्मान योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध करा रखी है। कुछ लोग कंपनियों आदि की सामूहिक बीमा के अंतर्गत आते हैं। कुछ लोगों ने निजी स्तर पर स्वास्थ्य बीमा ले रखा है। मगर चूंकि स्वास्थ्य बीमा की सुविधा का लाभ निजी अस्पतालों में ही लिया जाता है, वहां इनके दावे आदि को लेकर कई तरह की अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रहती हैं। कोरोना काल के बाद स्वास्थ्य बीमा की वार्षिक किस्तें पचास फीसद से अधिक बढ़ चुकी हैं। इसलिए स्वास्थ्य बीमा नियमों को लचीला बनाने के साथ-साथ इन्हें व्यावहारिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी भरोसेमंद कदम उठाने की जरूरत है।

RELATED ARTICLES

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना...

धराली से थराली तक: आपदा और उम्मीद के बीच पहाड़, हिमालय की गोद में बसे हमारे गांव कितने सुरक्षित

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड की धरती एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। कभी गढ़वाल के उत्तरकाशी में धराली गाँव तो कभी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

UTTARAKHAND BUDGET: 1.11 लाख करोड़ का बजट पेश, गरीब-युवा-किसान और महिलाओं पर फोकस

गैरसैंण/देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया।...

अर्थव्यवस्था में उत्तराखंड की ऊंची छलांग, जीडीपी डेढ़ गुना बढ़ी, प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी

देहरादून। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तेजी का दौर जारी है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹3,81,889 करोड़ पहुंच गया है,...

उत्तरांचल प्रेस क्लब में रंगारंग होली मिलन महोत्सव की धूम, रंगों की फुहार और लोक संगीत की गूंज में सरोबार हुए लोग

देहरादून। देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब का होली मिलन समारोह इस बार खास उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित हुआ। रंगों की फुहार, लोक...

दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, केजरीवाल और सिसोदिया बाइज्जत बरी

नई दिल्ली। दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री...

Recent Comments