Sunday, September 6, 2026
Home आर्टिकल बेरोजगारी का संगीन साया

बेरोजगारी का संगीन साया

एक तो आशंका है कि इस वर्ष विश्व की विकसित अर्थव्यवस्थाएं मंदी का शिकार हो सकती हैं। दूसरी तरफ टेक कंपनियां अब बड़े पैमाने पर एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। इस कारण पहले जितने कर्मचारियों की जरूरत पड़ती थी, अब उतनी नहीं रह गई है। नए साल की शुरुआत के साथ टेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी की खबरें आने लगी हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक सभी ने एलान किया है कि इस वर्ष वे अपनी कर्मचारियों की संख्या में कटौती करेंगी। इसकी दो वजहें बताई गई हैं। एक तो आशंका है कि इस वर्ष विश्व की विकसित अर्थव्यवस्थाएं मंदी का शिकार हो सकती हैं। दूसरी तरफ ये कंपनियां अब बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर रही हैं। इस कारण पहले जितने कर्मचारियों की जरूरत पड़ती थी, अब उतनी आवश्यकता नहीं रह गई है। इस बीच टीसीएस और इन्फोसिस जैसी भारत की भी बड़ी कंपनियों ने अपनी पिछली तिमाही की जो रिपोर्ट जारी की है, उसके परिणाम निराशाजनक आए हैं। इसका प्रभाव इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पर अवश्य पड़ेगा। मतलब यह कि हाई टेक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए संकटपूर्ण दिन आने वाले हैं। वैसे यह सूरत सिर्फ टेक क्षेत्र की नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने चेतावनी दी है कि नए साल में दुनिया भर में बेरोजगारी बढऩे का अंदेशा है।

आईएलओ ने कहा है कि साल 2022 में वैश्विक बेरोजगारी दर 5.3 प्रतिशत थी, जो पिछले साल थोड़ी बेहतर होकर 5.1 प्रतिशत रही। लेकिन आईएलओ के अध्ययन के मुताबिक 2024 में श्रम बाजार परिदृश्य और बेरोजगारी के बिगडऩे की आशंका है। इस साल वैश्विक बेरोजगारी दर बढक़र इस साल 5.2 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। आईएलओ के मुताबिक जी-20 के सदस्य अधिकांश देशों में अतिरिक्त आय में कमी आई है। महंगाई बने रहने की वजह से जीवन स्तर में जो गिरावट हुई है, वह जल्द सुधरने वाली नहीं है। आईएलओ ने दुनिया भर में बढ़ती गैर-बराबरी और सुस्त उत्पादकता पर चिंता जताई है। लेकिन आईएलओ ने अपने एक अन्य अध्ययन के आधार पर कहा है कि चीन, रूस और मेक्सिको को छोडक़र जी-20 के सदस्य देशों में 2023 में औसत वास्तविक वेतन में गिरावट आई हुई। ब्राजील, इटली और इंडोनेशिया  में वास्तविक वेतन में सबसे तेज गिरावट देखी गई। तो उभरता आर्थिक परिदृश्य सबके सामने है, जिस पर नीति निर्माताओं को चिंता करने की जरूरत है।

RELATED ARTICLES

खेल मैदान बचाइए, तभी खेल संस्कृति बचेगी, खेल नीति में उत्तराखंड को इस पर फोकस करने की जरूरत

उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक सुविधाओं से लैस बहुमंजिला विद्यालय भवनों की संख्या बढ़ रही...

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

सैलरी खत्म होने से पहले खत्म हो जाता है पैसा? अपनाइए सैलरी मैनेजमेंट का यह आसान मनी प्लानिंग फॉर्मूला,

देहरादून। अच्छी सैलरी होने के बावजूद यदि हर महीने हाथ तंग रहता है, तो समस्या कमाई की नहीं, पैसे की प्लानिंग की हो सकती...

देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता मदरसों पर शिकंजा, उत्तराखंड में अब तक 20 का संचालन बंद

देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों की जांच के बाद प्रशासन की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में एक मदरसा...

डीएम हुए सख्तः देहरादून में नदियों में कूड़ा फेंकने वालों पर होगी FIR, अवैध डंपिंग साइटों पर भी कार्रवाई

देहरादून। नदियों और नदी किनारों पर कूड़ा डालने वालों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शहरी निकायों को...

यूकॉस्ट में शिक्षक दिवस पर व्य़ाख्यानः हिमालयी आपदाओं से निपटने में शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका अहम- प्रो. दुर्गेश पंत

देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आपदा संबंधी चुनौतियों के बीच जल स्रोतों के संरक्षण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता...

Recent Comments