Thursday, June 18, 2026
Home आर्टिकल अमेरिका सचमुच गंभीर है

अमेरिका सचमुच गंभीर है

साफ है कि अमेरिका पन्नूं मामले की तह तक जाने को लेकर अडिग है। भारत भी इस मामले में अमेरिका को संभवत: वैसी चुनौती नहीं देना चाहता, जैसा उसने कनाडा के मामले किया था। ऐसे में अब सब कुछ भारतीय जांच की रिपोर्ट पर निर्भर है। खालिस्तानी कार्यकर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नूं की हत्या की कथित कोशिश के मामले में अमेरिका भारत के प्रति कोई रियायत बरतने के मूड में नहीं दिखता। लगभग रोजमर्रा के स्तर पर वहां के सरकारी अधिकारी या प्रवक्ता ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनका सार यह होता है कि अमेरिका इस मामले में दबाव बनाए हुए है। ताजा बयान अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर का है, जिन्होंने कहा है कि अमेरिका ने यह मसला सरकार के सबसे वरिष्ठ स्तरों पर उठाया है। मिलर ने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका ने पन्नूं के मामले को कनाडा में हुई खालिस्तानी उग्रवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले से जोड़ दिया है। मैथ्यू ने यह अमेरिकी रुख दोहराया कि उनके देश ने भारत से कनाडा की जांच में सहयोग करने का ‘अनुरोध’ किया है।

इस मामले में भारत में कराई जा रही जांच का स्वागत करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें इसके नतीजे का इंतजार रहेगा। मिलर ने भी इसका जिक्र किया और कहा- ‘भारत ने इस मामले की जांच का सार्वजनिक एलान किया है। हम इसके नतीजों का इंतजार करेंगे, लेकिन यह एक ऐसा मामला है, जिसे हम बहुत गंभीरता से लेते हैँ।’ इसी बीच ये खबर आई है कि अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर ए व्रे इस जांच की समीक्षा करने के लिए 11-12 दिसंबर को भारत की यात्रा करेंगे। इस दौरान मुलाकात एनआईए के प्रमुख दिनकर गुप्ता से होगी। इसके पहले इसी हफ्ते अमेरिका के प्रमुख उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फाइनर भारत आए। हालांकि उनकी यात्रा का घोषित मकसद महत्त्वपूर्ण एवं उभरती तकनीक के मामले में भारत-अमेरिका पहल की समीक्षा करना था, लेकिन अमेरिका ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस दौरान पन्नूं मामले को भी फाइनर ने उठाया। तो साफ है कि अमेरिका इस मामले की तह तक जाने को लेकर अडिग है। भारत सरकार भी इस मामले में अमेरिका को संभवत: वैसी चुनौती नहीं देना चाहती, जैसा उसने कनाडा के मामले किया था। ऐसे में अब सब कुछ जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष पर निर्भर हो गया है।

RELATED ARTICLES

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

विकसित भारत रोजगार योजना से रोजगार पाने और देने वालों को मिल रहा फायदा, 19 जून को राष्ट्रीय कार्यक्रम

देहरादून। देश में रोजगार सृजन को गति देने और युवाओं को औपचारिक क्षेत्र से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विकसित...

11 साल बाद खुला किसाऊ बांध परियोजना का रास्ता, उत्तराखंड-हिमाचल समेत छह राज्यों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली। उत्तर भारत की बहुप्रतीक्षित किसाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। विभिन्न कारणों से...

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

एसडीजी में उत्तराखंड की बड़ी छलांग, देशभर में 10वें से पहले स्थान पर पहुंचा, जिलों में रुद्रप्रयाग अव्वल

देहरादून। उत्तराखंड ने नीति आयोग के एसडीजी (Sustainable Development Goals) इंडिया इंडेक्स में बड़ी छलांग लगाई है। पिछली रैंकिग में 10वें स्थान पर रहा...

Recent Comments