Tuesday, March 10, 2026
Home आर्टिकल भारत का संदेश क्या है?

भारत का संदेश क्या है?

भारत सरकार को यह बात अवश्य याद रखनी चाहिए कि उसके सामने असली चुनौती वह रुख और संदेश तय करने की है, जिससे वह भारत को नए उभरते वैश्विक ढांचे में नेतृत्वकारी भूमिका रखने वाले देशों में शामिल कर सके। यह खबर महत्त्वपूर्ण है कि भारत अपनी विदेश सेवा के पुनर्गठन की योजना बना रहा है। इसके तहत प्रवेश स्तर (एंट्री लेवल) के अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके पहले विदेश मामलों की संसदीय स्थायी कमेटी ने एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत की राजनयिक सेवा अपेक्षाकृत छोटी अर्थव्यवस्था वाले देशों के मुकाबले भी कम स्टाफ वाली है।

कमेटी ने सिफारिश की थी कि भारतीय विदेश सेवा में मौजूद बल की तुलना और चीन के राजनयिक मिशनों और अन्य प्रमुख विकासशील देशों की विदेश सेवाओं के साथ की जानी चाहिए। हाल में भारत सरकार ने भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की समीक्षा और पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बदलते वक्त के तकाजों को अगर ध्यान में रखें, तो इस निर्णय को स्वागतयोग्य माना जाएगा। मगर इससे यह सोच लेना शायद सही नहीं होगा कि यह कदम उठा लिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विश्व मंचों पर भारत की उपस्थिति अधिक प्रभावशाली हो जाएगी। आखिरकार आईएफएस अधिकारी महज संदेशवाहक होते हैं। संदेश देश का राजनीतिक नेतृत्व तैयार करता है।

इस समय सबसे ज्यादा भ्रम इसको लेकर पैदा हो गया है कि प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख क्या है और वह दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है? बीते पौने दो साल के अंदर दुनिया में दो बड़े संकट (यूक्रेन युद्ध और इजराइल-फिलस्तीन युद्) खड़े हुए। मगर इन दोनों मामलों में भारत का रुख संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर मतदान में भाग ना लेना है। उधर दुनिया में तीखे होते ध्रुवीकरण के बीच हर नाव पर कदम रखने की नीति थोड़े समय के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन उससे देश की छवि और हैसियत नहीं चमकेगी।

सरकार को यह अवश्य याद रखना चाहिए कि उसके सामने असली चुनौती वह रुख और संदेश तय करने की है, जिससे वह भारत को नए उभरते वैश्विक ढांचे में नेतृत्वकारी भूमिका रखने वाले देशों में शामिल कर सके। वरना, विदेश सेवा का विस्तार महज ऐसे नौकरशाहों की संख्या बढऩा भर बनकर रह जाएगा, जो पेचीदा मुद्दों पर वैश्विक बहस के बीच दिशाहीन नजर आएंगे। उसे याद रखना चाहिए कि नौकरशाहों का दिशा-निर्देशन करना उसका दायित्व है।

RELATED ARTICLES

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना...

धराली से थराली तक: आपदा और उम्मीद के बीच पहाड़, हिमालय की गोद में बसे हमारे गांव कितने सुरक्षित

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड की धरती एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। कभी गढ़वाल के उत्तरकाशी में धराली गाँव तो कभी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

UTTARAKHAND BUDGET: 1.11 लाख करोड़ का बजट पेश, गरीब-युवा-किसान और महिलाओं पर फोकस

गैरसैंण/देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया।...

अर्थव्यवस्था में उत्तराखंड की ऊंची छलांग, जीडीपी डेढ़ गुना बढ़ी, प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी

देहरादून। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तेजी का दौर जारी है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹3,81,889 करोड़ पहुंच गया है,...

उत्तरांचल प्रेस क्लब में रंगारंग होली मिलन महोत्सव की धूम, रंगों की फुहार और लोक संगीत की गूंज में सरोबार हुए लोग

देहरादून। देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब का होली मिलन समारोह इस बार खास उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित हुआ। रंगों की फुहार, लोक...

दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, केजरीवाल और सिसोदिया बाइज्जत बरी

नई दिल्ली। दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री...

Recent Comments