Friday, May 1, 2026
Home आर्टिकल भारत का संदेश क्या है?

भारत का संदेश क्या है?

भारत सरकार को यह बात अवश्य याद रखनी चाहिए कि उसके सामने असली चुनौती वह रुख और संदेश तय करने की है, जिससे वह भारत को नए उभरते वैश्विक ढांचे में नेतृत्वकारी भूमिका रखने वाले देशों में शामिल कर सके। यह खबर महत्त्वपूर्ण है कि भारत अपनी विदेश सेवा के पुनर्गठन की योजना बना रहा है। इसके तहत प्रवेश स्तर (एंट्री लेवल) के अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके पहले विदेश मामलों की संसदीय स्थायी कमेटी ने एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत की राजनयिक सेवा अपेक्षाकृत छोटी अर्थव्यवस्था वाले देशों के मुकाबले भी कम स्टाफ वाली है।

कमेटी ने सिफारिश की थी कि भारतीय विदेश सेवा में मौजूद बल की तुलना और चीन के राजनयिक मिशनों और अन्य प्रमुख विकासशील देशों की विदेश सेवाओं के साथ की जानी चाहिए। हाल में भारत सरकार ने भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की समीक्षा और पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बदलते वक्त के तकाजों को अगर ध्यान में रखें, तो इस निर्णय को स्वागतयोग्य माना जाएगा। मगर इससे यह सोच लेना शायद सही नहीं होगा कि यह कदम उठा लिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विश्व मंचों पर भारत की उपस्थिति अधिक प्रभावशाली हो जाएगी। आखिरकार आईएफएस अधिकारी महज संदेशवाहक होते हैं। संदेश देश का राजनीतिक नेतृत्व तैयार करता है।

इस समय सबसे ज्यादा भ्रम इसको लेकर पैदा हो गया है कि प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख क्या है और वह दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है? बीते पौने दो साल के अंदर दुनिया में दो बड़े संकट (यूक्रेन युद्ध और इजराइल-फिलस्तीन युद्) खड़े हुए। मगर इन दोनों मामलों में भारत का रुख संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर मतदान में भाग ना लेना है। उधर दुनिया में तीखे होते ध्रुवीकरण के बीच हर नाव पर कदम रखने की नीति थोड़े समय के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन उससे देश की छवि और हैसियत नहीं चमकेगी।

सरकार को यह अवश्य याद रखना चाहिए कि उसके सामने असली चुनौती वह रुख और संदेश तय करने की है, जिससे वह भारत को नए उभरते वैश्विक ढांचे में नेतृत्वकारी भूमिका रखने वाले देशों में शामिल कर सके। वरना, विदेश सेवा का विस्तार महज ऐसे नौकरशाहों की संख्या बढऩा भर बनकर रह जाएगा, जो पेचीदा मुद्दों पर वैश्विक बहस के बीच दिशाहीन नजर आएंगे। उसे याद रखना चाहिए कि नौकरशाहों का दिशा-निर्देशन करना उसका दायित्व है।

RELATED ARTICLES

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

अल्मोड़ा के डोल आश्रम में श्री पीठम स्थापना महोत्सव, मुख्यमंत्री धामी ने किया 1100 कन्याओं का पूजन

अल्मोड़ा। अल्मोड़ा जनपद के डोल स्थित आश्रम में आयोजित श्री पीठम स्थापना महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहभागिता कर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण...

अब 35 साल तक बन सकेंगे वन दरोगा, 250 नई बसों की खरीद को मंजूरी, कैबिनेट ने लगाई कई प्रस्तावों पर मोहर

देहरादून। राजधानी देहरादून में गुरुवार को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी, जो सीधे तौर पर रोजगार, शिक्षा, परिवहन...

चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की न हो कमी, सीएम धामी ने की मांग

नई दिल्ली। नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने चारधाम...

विपक्ष ने आधी आबादी को हक दिलाने के प्रयास को विफल कर देश के साथ किया महापापः सीएम धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने हजारों...

Recent Comments