देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र शनिवार को संपन्न हो गया। चार दिवसीय सत्र के दौरान सरकार ने पहली बार एक लाख करोड़ से ज्यादा का बजट पेश किया। इसके अलावा इस बार सरकार ने बहुप्रतिक्षित भू कानून का विधेयक भी सदन में पेश किया और पास कराया। इसके अलावा 12 अन्य विधेयक भी सदन के पटल पर रखे गए और सर्वसम्मति से पास भी हुए। साथ ही, इस बार का बजट सत्र पक्ष और विपक्ष के बीच विवादों के लिए भी याद रखा जाएगा। वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट की नोक-झोंक व कृषि मंत्री गणेश जोशी का सवाल में फंसना इस पूरे सत्र के दौरान चर्चा में रही।
शनिवार को उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए समाप्त हो गया। पांच दिनों में 37 घंटे 49 मिनट तक चले सदन के दौरान सरकार ने नमो थीम पर आधारित एक लाख करोड़ से ज्यादा का बजट पेश किया। पहली बार उत्तराखंड के बजट का आकार एक लाख करोड़ के पार पहुंचा। सरकार ने इसमें सभी वर्गों को लाभान्वित करने वाली योजनाओं को शामिल करने का दावा किया। बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के बयान के बाद खासा हंगामा भी हुआ। इसके बाद हरिद्वार की भगवानपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक ममता राकेश का बयान भी चर्चा में रहा, जिसमें उन्हें विधायकों को शिष्टाचार सीखने के लिए कक्षा एक से दोबारा शिक्षा की जरूरत जताई। विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने भी उनके बयान पर सहमति जताई।
सारी लाइम लाइट चुरा ले गए विवाद
सरकार ने इस बार भू कानून का विधेयक पटल पर रखा और उसे पास भी कराया। तब माना जा रहा था कि यह प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र बनेगा और सरकार को इसका फायदा मिलेगा। लेकिन वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के बयान के बाद कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट से हुई उनकी तकरार ने इस मंशा पर पानी फेर दिया। खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनके बचाव में आना पड़ा। बची खुची कसर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने पूरी कर दी, जो विधानसभा में एक सवाल पर बुरी तरह घिर गए।