Saturday, March 14, 2026
Home आर्टिकल फिर भी निशाना कांग्रेस

फिर भी निशाना कांग्रेस

दोनों सदनों में मोदी के भाषण का सार रहा कि कांग्रेस भले आज बेहद कमजोर हो और कुछ बौद्धिक क्षेत्रों को छोड़ कर नेहरू की विरासत को शायद ही कहीं याद किया जाता हो, लेकिन भाजपा अब भी इन दोनों को ही अपनी प्रमुख चुनौती मानती है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सदनों में निशाने पर कांग्रेस को रखा। पार्टी को गुजरे जमाने की कहानी बताया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खडग़े जैसे नेताओं का मखौल भी उड़ाया। मोदी की इस शैली को अनेक लोग संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं मानते। लेकिन अब उनकी इस शैली से देश भलि-भांति परिचित हो चुका है। यह अपेक्षा अब शायद ही किसी को रहती होगी कि कम-से-कम संसद में बोलते वक्त नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री के अनुरूप बोलेंगे। इसलिए इस बिंदु को छोड़ते हुए उन्होंने जो कहा, उसके मतलब समझने पर लोग अब अधिक ध्यान देते हैं। इस बार दोनों सदनों में दिए उनके भाषण का सार रहा कि कांग्रेस भले आज बेहद कमजोर हो चुकी हो और कुछ बौद्धिक क्षेत्रों को छोड़ कर जवाहर लाल नेहरू की विरासत को शायद ही कहीं याद किया जाता हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (और संभवत: उसके मातृ संगठन आरएसएस) की नजर में अब भी ये दोनों को ही उसके लिए प्रमुख राजनीतिक चुनौती हैं। यह बात उसके व्यवहार में भी झलकती है।

2022-23 में राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ‘नफरत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान’ की जो उपमा उछाली, उससे बने प्रभाव को भाजपा ने पूरी गंभीरता से लिया। खुद राहुल गांधी ने भले उस कथानक को बीच में छोड़ दिया, लेकिन भाजपा ऐसे प्रयासों से उत्पन्न हो सकने वाली चुनौती को बेहतर समझती है। इसीलिए इस बार जब गांधी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ शुरू की, तो शुरू से ही उसकी चमक फीकी करने की रणनीति पर वह आगे बढ़ी है। इसके लिए कांग्रेस/इंडिया गठबंधन से पाला-बदल कराने का तरीका अपनाया गया है। मुरली देवड़ा और नीतीश कुमार इसकी मिसालें हैं। और इसी क्रम में राहुल की यात्रा के उत्तर प्रदेश में प्रवेश से ठीक पहले जयंत चौधरी के पाला-बदल के कयास को भी मीडिया में उछाला गया है। प्रधानमंत्री ने जिस तरह कांग्रेस और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला और उन्हें मजाक का पात्र बनाने की कोशिश की, शायद वह भी भाजपा की इसी सुविचारित रणनीति का संकेत है।

RELATED ARTICLES

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना...

धराली से थराली तक: आपदा और उम्मीद के बीच पहाड़, हिमालय की गोद में बसे हमारे गांव कितने सुरक्षित

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड की धरती एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। कभी गढ़वाल के उत्तरकाशी में धराली गाँव तो कभी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

रसोई गैस और ईंधन की कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रख रही सरकार, तीन दिनों में 280 जगह किया निरीक्षण

देहरादून। प्रदेश में एलपीजी और अन्य ईंधन की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले...

UTTARAKHAND BUDGET: 1.11 लाख करोड़ का बजट पेश, गरीब-युवा-किसान और महिलाओं पर फोकस

गैरसैंण/देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया।...

अर्थव्यवस्था में उत्तराखंड की ऊंची छलांग, जीडीपी डेढ़ गुना बढ़ी, प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी

देहरादून। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तेजी का दौर जारी है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹3,81,889 करोड़ पहुंच गया है,...

उत्तरांचल प्रेस क्लब में रंगारंग होली मिलन महोत्सव की धूम, रंगों की फुहार और लोक संगीत की गूंज में सरोबार हुए लोग

देहरादून। देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब का होली मिलन समारोह इस बार खास उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित हुआ। रंगों की फुहार, लोक...

Recent Comments