Monday, June 8, 2026
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‘शब्दोत्सव’ के पंचम सत्र में बोले मुख्यमंत्री धामी, देवभूमि की मूल पहचान और विधिसम्मत शासन सर्वोच्च प्राथमिकता

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित मेजर ध्यान चंद स्टेडियम में आयोजित ‘शब्दोत्सव’ कार्यक्रम के पंचम सत्र ‘धर्मरक्षक धामी’ में सहभागिता करते हुए उत्तराखण्ड से जुड़े समसामयिक विषयों पर राज्य सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को विस्तार से रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक समरसता और कानून आधारित शासन व्यवस्था को मजबूत करना सरकार का मूल संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी भूमि पर सुनियोजित अवैध कब्जों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 7,000 एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया है। शिक्षा क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 01 जुलाई 2026 के बाद केवल वही मदरसे संचालित होंगे जो राज्य शिक्षा बोर्ड के निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करेंगे। गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नियमों का पालन न करने वाले 250 से अधिक मदरसों को बंद किया गया है। उन्होंने दोहराया कि यह निर्णय किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को समान अवसर देने के लिए है और राज्य में किसी भी प्रकार की कट्टरवादी मानसिकता को पनपने नहीं दिया जाएगा।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका दायरा केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे योजनाओं की पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन भी जुड़ा है। आयुष्मान योजना के व्यय में सामने आए अंतर का उदाहरण देते हुए उन्होंने सत्यापन की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने बताया कि राशन कार्ड, आधार और वोटर कार्ड के सत्यापन की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है और इसका उद्देश्य व्यवस्था को दुरुस्त करना है, न कि किसी वर्ग को लक्षित करना।

‘धर्मरक्षक धामी’ विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सभी कदम पूरी तरह विधिसम्मत हैं। अब तक लगभग 600 अवैध ढांचों को हटाया गया है, जिनमें किसी प्रकार के वैध अवशेष नहीं पाए गए। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के प्रयासों को सख्ती से रोका गया है और देवभूमि के देवत्व तथा मूल स्वरूप की रक्षा उनकी प्राथमिकता और व्यक्तिगत संकल्प है।

आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन और सरकार सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य ने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की दो लाख से अधिक विकास योजनाएं संचालित हैं। नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्य ‘अचीवर्स’ श्रेणी में रहा है और स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में दूसरा स्थान हासिल किया है। सिंगल विंडो सिस्टम भी टॉप अचीवर्स में शामिल रहा है।

पर्यटन क्षेत्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड को बेस्ट वाइल्डलाइफ और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन के राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2024 में जाखोल, हर्षिल, गुंजी और सूपी गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया।

मानसखण्ड और केदारखण्ड से जुड़ी परियोजनाओं पर उन्होंने कहा कि चारधाम ऑल वेदर रोड, बदरीनाथ मास्टर प्लान, ‘भव्य केदार, दिव्य केदार’, हेमकुण्ड साहिब और केदारनाथ रोपवे जैसी योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों के पुनर्निर्माण, सौंदर्यीकरण और कनेक्टिविटी पर कार्य हो रहा है। दिल्ली–देहरादून कनेक्टिविटी पर उन्होंने बताया कि एलीवेटेड रोड परियोजना लगभग पूर्ण है, जिससे यात्रा समय 2 से 2.5 घंटे रह जाएगा, जबकि देहरादून में रिंग रोड और आंतरिक एलीवेटेड रोड पर भी काम प्रगति पर है।

समापन में मुख्यमंत्री ने कहा कि सही नीयत, दृढ़ संकल्प और पारदर्शी शासन के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना ही सरकार का लक्ष्य है और इसी दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

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