देहरादून। देहरादून की विशेष पोक्सो अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी सावेज अली उर्फ लक्की को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने पहचान छिपाकर या शुरू से शादी का झूठा वादा कर महिला के साथ संबंध बनाए थे।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी पोक्सो मंजू सिंह मुंडे की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को आईपीसी की धारा 376 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
पटेलनगर थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा
पटेलनगर थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमे के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया था कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उसकी मुलाकात आरोपी से हुई थी। आरोप था कि आरोपी ने खुद को ‘लक्की’ नाम से हिंदू बताया, सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाई और शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
शिकायत में महिला ने दो बार गर्भवती होने, गर्भपात की दवा देने, मारपीट करने, धमकी देने और व्यापार के नाम पर 4 से 5 लाख रुपये लेने के आरोप भी लगाए थे।
अदालत में किन तथ्यों पर हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय बड़ोनी ने महिला के बयान और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आरोपों का विरोध किया। जिरह में महिला ने स्वीकार किया कि उसका विवाह वर्ष 2007 में हो चुका था और उसकी एक बेटी भी है। हालांकि, पहले विवाह के समाप्त होने या पति की मृत्यु से संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए।
अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि महिला आरोपी के साथ अपनी इच्छा से रहती थी और दोनों एक होटल में साथ ठहरे थे। होटल में पहचान पत्र जमा कराए जाने की बात भी रिकॉर्ड में आई।
मुकदमा दर्ज होने और आरोपी के जेल जाने के बाद महिला तीन बार उससे मिलने जिला कारागार गई थी। इनमें करवाचौथ के दिन की मुलाकात भी शामिल बताई गई।
मेडिकल रिपोर्ट और लेन-देन के आरोपों की पुष्टि नहीं
मेडिकल रिपोर्ट में महिला के गर्भवती होने, गर्भपात कराने या मारपीट के आरोपों की पुष्टि करने वाला ठोस साक्ष्य नहीं मिला। कथित 4 से 5 लाख रुपये के लेन-देन और जान से मारने की धमकी से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, चैट या अन्य स्वतंत्र साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
शादी का वादा टूटने भर से दुष्कर्म का मामला नहीं बनता
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आपसी सहमति से बने संबंधों में बाद में शादी न होने मात्र से दुष्कर्म का अपराध स्थापित नहीं हो जाता। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि शादी का वादा शुरुआत से ही धोखा देने की नीयत से किया गया था और उसी आधार पर सहमति ली गई थी।
अदालत ने कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसके बाद सावेज अली उर्फ लक्की को धारा 376 आईपीसी के आरोप से बरी कर दिया गया।






