देहरादून। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री खजान दास के खिलाफ उनकी ही पार्टी से जुड़े लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। चकराता विधानसभा क्षेत्र से आए भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित मंत्री के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़ी योजनाओं में लाभार्थियों के चयन और कार्यों के आवंटन पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने कमीशनखोरी के गंभीर आरोप भी लगाए। इन आरोपों पर खजान दास ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ एक भी आरोप साबित हो गया तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने इससे आगे बढ़कर आत्महत्या तक करने की बात कही।
प्रदर्शन के बाद मंत्री की इस प्रतिक्रिया ने मामले को और गंभीर बना दिया है। खास बात यह है कि सवाल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े लोगों की ओर से उठाए गए हैं।
चकराता की योजनाओं को लेकर क्यों हुआ प्रदर्शन?
विवाद अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए संचालित योजनाओं से जुड़ा है। चकराता विधानसभा क्षेत्र से पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि योजनाओं के लाभार्थियों के चयन और विभिन्न कार्यों के आवंटन में गड़बड़ी हो रही है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कथित तौर पर 15 से 20 प्रतिशत कमीशन के कारण करीब 80 प्रतिशत काम कांग्रेस से जुड़े लोगों को दिए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण वास्तविक पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आरोपों पर कैबिनेट मंत्री खजान दास का पलटवार
मामला सामने आने के बाद खजान दास ने आरोप लगाने वालों को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि उनके ऊपर लगाया गया एक भी आरोप प्रमाणित हो जाए तो वह अपने पद पर नहीं रहेंगे। खजान दास ने कहा कि आरोप साबित होने पर वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और आत्महत्या तक कर लेंगे।
मंत्री के इस बयान के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अब सवाल केवल योजनाओं के आवंटन का नहीं रह गया है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर सरकार या संबंधित विभाग की तरफ से कोई जांच कराई जाती है या नहीं।
अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ भाजपा नेताओं की नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदर्शन करने वाले लोग भाजपा से जुड़े बताए गए हैं। खजान दास स्वयं भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार वह वर्तमान मंत्रिमंडल में समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण और भाषा विभाग संभाल रहे हैं।
ऐसे में चकराता से आए पार्टी नेताओं का मंत्री आवास तक पहुंचकर प्रदर्शन करना भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर पैदा हुई नाराजगी को सामने लाता है।
आरोपों के प्रमाण पर टिकी आगे की कहानी
प्रदर्शनकारियों की तरफ से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनके समर्थन में सामने आने वाले दस्तावेज और आधिकारिक जांच ही यह तय करेगी कि उनमें कितनी सच्चाई है।
यदि कार्यों के आवंटन और लाभार्थियों के चयन को लेकर जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि किस योजना के तहत कितने काम स्वीकृत किए गए, लाभार्थियों के चयन का आधार क्या था और काम किन लोगों अथवा संस्थाओं को आवंटित किए गए।
फिलहाल एक तरफ भाजपा से जुड़े प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं और दूसरी तरफ मंत्री खजान दास ने उन्हें पूरी तरह चुनौती देते हुए आरोप साबित होने पर पद छोड़ने तक की बात कही है। उनके आत्महत्या संबंधी बयान ने इस राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया है।






