देहरादून। कैमरे की नजर से उत्तराखंड की संस्कृति, प्रकृति और समाज के अलग-अलग रंगों को सामने लाने वाली फोटो प्रदर्शनी का आयोजन रविवार को दून लाइब्रेरी एवं शोध केंद्र में किया गया। उत्तराखंड न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन (यूएनसीए) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में फोटो जर्नलिस्टों के छायाचित्रों के साथ मानसून थीम आधारित फोटो प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन ने आम लोगों के लिए तस्वीरें बनाना आसान कर दिया है, लेकिन फोटो जर्नलिज्म की जिम्मेदारी इससे कहीं बड़ी है।

उन्होंने कहा कि एक फोटो जर्नलिस्ट घटनाओं को केवल कैमरे में कैद नहीं करता, बल्कि वह समाज की वास्तविकता, संवेदनाओं और समय के महत्वपूर्ण क्षणों को दर्ज करता है। ऐसी तस्वीरें आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास का साक्ष्य बनती हैं।
यूएनसीए अध्यक्ष राजू पुशोला ने कहा कि एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच असली चुनौती तस्वीरों की विश्वसनीयता बचाए रखने की है। उन्होंने कहा कि एक फोटो जर्नलिस्ट की पहचान उसके कैमरे से नहीं, बल्कि उसकी ईमानदार नजर, अनुभव और सच्चाई के प्रति प्रतिबद्धता से होती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए फोटो जर्नलिज्म कार्यशाला भी रखी गई। दून विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के छात्र-छात्राओं को अनुभवी छायाकारों ने फील्ड रिपोर्टिंग, मौके की तस्वीर चुनने और कैमरे के जरिए प्रभावी कहानी कहने के तरीकों की जानकारी दी।
मानसून विषय पर आयोजित फोटो प्रतियोगिता में दून विश्वविद्यालय की छात्रा समृद्धि ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। रितिका पाल दूसरे और रिद्धि तीसरे स्थान पर रहीं। सुवानी कृष्णा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कैमरामैन किशोर अरोड़ा, फोटोग्राफर इंद्रदेव रतूड़ी और जितेंद्र नेगी को मीडिया जगत में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उत्तराखंड सिने अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार प्राप्त करने वाले कैलाश कंडवाल को भी सम्मान मिला।
कार्यक्रम में पुनीत मित्तल और बीर सिंह पवार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। यूएनसीए अध्यक्ष राजू पुशोला, सचिव मुकेश राजपूत, उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष कैलाश कंडवाल, सह-सचिव अफजाल अहमद और संगठन के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।






